सेशन ऐप आखिर क्या है, जिसे इस्तेमाल करके उमर अपने हैंडलर से लगातार जुड़ा हुआ था

दिल्ली में दस नवंबर का दिन हमेशा के लिए याद किया जाएगा, सुबह शहर सामान्य था, लेकिन दोपहर तक हालात पूरी तरह बदल गए, लाल…

दिल्ली में दस नवंबर का दिन हमेशा के लिए याद किया जाएगा, सुबह शहर सामान्य था, लेकिन दोपहर तक हालात पूरी तरह बदल गए, लाल किले के पास खड़ी हुंडई आई ट्वेंटी अचानक जोरदार धमाके के साथ उड़ी और आसपास के इलाके में अफरा तफरी मच गई, धमाके की आवाज दूर तक सुनाई दी, इमारतों तक कंपन महसूस हुआ, लोग घबराकर सड़क पर भाग पड़े, इस हादसे में तेरह लोगों की जान चली गई, कई घायल अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहे हैं।

जांच आगे बढ़ी तो एजेंसियों के हाथ एक नाम लगा, उमर नबी, जिसे उमर मोहम्मद भी कहा जाता है, यही शख्स कार में मौजूद था, शुरुआती जांच में पता चला कि धमाके से कुछ समय पहले और बाद में वह अपने विदेशी हैंडलर से संपर्क में था, और यह संपर्क जिस ऐप के जरिए हो रहा था उसका नाम सामने आते ही हलचल मच गई, ऐप का नाम है सेशन ऐप।

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सेशन ऐप क्या है, इसे इंटरनेट पर खोजने पर पता चलता है कि यह एक प्राइवेट मैसेजिंग ऐप है, इसकी खास बात यह है कि इसमें कोई सेंट्रल सर्वर नहीं चलता, आपकी चैट कहीं जमा नहीं होती, कौन किससे क्या बात कर रहा है इसका कोई निशान नहीं मिलता, इसी वजह से इसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है, यह ऐप प्ले स्टोर और ऐप स्टोर दोनों पर मौजूद है।

इस ऐप में अकाउंट बनाने के लिए न फोन नंबर देना होता है, न ईमेल डालना होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल करने वाले को ट्रैक कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है, कंपनी का दावा है कि वह किसी भी यूजर का डाटा किसी को नहीं देती, न बेचती और न साझा करती, इसी कारण इसका इस्तेमाल गुप्त बातचीत के लिए किया जाता है।

सूत्रों का कहना है कि उमर का संपर्क तुर्की की राजधानी अंकारा में बैठे उसके हैंडलर से था, जिसका कोडनेम यु कासा बताया जा रहा है, दोनों की बातचीत पूरी तरह सेशन ऐप पर चल रही थी, यह भी जानकारी सामने आई है कि मार्च दो हजार बाईस में भारत से कुछ लोग अंकारा गए थे, शक है कि उनका रिश्ता भी इसी नेटवर्क से जुड़ सकता है।

अब पूरा मामला व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की तरफ बढ़ गया है, यह वही नेटवर्क माना जाता है जिसमें पढ़े लिखे और समाज में सम्मानित दिखने वाले लोग शामिल रहते हैं, ऐसे लोग जो डॉक्टर होते हैं, इंजीनियर होते हैं, प्रोफेसर होते हैं, और अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल गलत दिशा में करते हैं, यही लोग अपनी कौशल से आतंक फैलाने में मदद पहुंचाते हैं, जांच एजेंसियों को शक है कि इस धमाके की कड़ी भी इसी मॉड्यूल तक पहुंच सकती है।