विषम भूगोल वाले उत्तराखंड के गांव में जहां पहाड़ बड़ी समस्या बने हुए हैं। वहीं वन्यजीवों के हमले से भी लोगों का जीवन खतरे में आ गया है। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या काफी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के ना आंगन सुरक्षित है और ना ही खेत खलिहान राज्य का शायद कोई ही ऐसा गांव होगा जहां वन्य जीवों का खौफ न हो।
वन्य विभाग के सर्वेक्षण से पता चला है कि वन्यजीवों के हमले की दृष्टि से 487 गांव बेहद संवेदनशील है इन गांवों के लोग गुलदार बाघ की दहाड़ से सहमे हुए हैं।
गांव से निरंतर हो रहे पलायन के बाद वन्यजीवों के हमले बढ़ गए हैं आए दिन बाघ, गुलदार, भालू, हाथी जैसे जानवरों के हमले सुर्खियां बन रहे हैं। विशेषकर, पहाड़ में तो गुलदारों की सक्रियता ने रातों की नींद और दिन का चैन छीना हुआ है।
ऐसी स्थिति में शाम होते ही गांव मैं रहने वाली रौनक अब गायब हो गई है सूरज ढलने के बाद हर तरफ सन्नाटा फंसा जाता है और इसके बाद भी खतरा कम नहीं होता मौत रूपी गुलदार कब आंगन में आ जाए यह किसी को नहीं पता।
यूं कहें कि पानी अब सिर से ऊपर बहने लगा है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस सबको देखते हुए वन विभाग ने सर्वेक्षण कराया तो बात सामने आई कि वन प्रभागों से सटे 487 गांव बेहद संवेदनशील हैं। इनमें पिथौरागढ़ और गढ़वाल वन प्रभाग से लगे गांवों की संख्या सर्वाधिक है।
जिस तरह गांव में वन्यजीवों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं उसे आने वाले दिनों में वह संख्या बढ़ाने की और उम्मीद है ऐसे में संवेदनशील गांव में वन्यजीवों के हमले को रोकने के लिए कई बड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं। लेकिन अभी तक उससे कोई फायदा नहीं हुआ है।
संवेदनशील गांव
पिथौरागढ़ 86
गढ़वाल 71
बागेश्वर 48
कार्बेट टाइगर रिजर्व 45
हरिद्वार 35
तराई पश्चिमी 29
हल्द्वानी 26
अल्मोड़ा 21
चंपावत19
टिहरी15
लैंसडौन 15
तराई पूर्वी15
देहरादून10
नरेंद्रनगर 10
राजाजी टाइगर रिजर्व 07
इस वर्ष अब तक वन्यजीवों के हमले मे घायल और मरने वालो की संख्या
बाघ -11, 05
गुलदार -08 ,73
हाथी -07, 03
सांप -05, 80
भालू -04, 39
जंगली सूअर -00, 18
बंदर-लंगूर -00, 86
अन्य -00, 07
संवेदनशील गांवों में स्थानीय निवासियों के सहयोग से त्वरित प्रतिक्रिया दल बनाए गए हैं। सोलर लाइट की व्यवस्था, कूड़े का उचित प्रबंधन, वन सीमा पर बायो फेंसिंग, गांवों में झाड़ी कटान, लिविंग विद लेपर्ड जैसे कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
जनजागरण पर भी जोर है। संघर्ष थामने को और क्या उपाय हो सकते हैं, इसे लेकर मंथन जारी है।
