अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार की मांगों को मजबूती देने और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की खातिर आज 11 जनवरी को कई सामाजिक संगठनों और कांग्रेस ने उत्तराखंड बंद का आह्वान किया। सुबह से ही राज्य के कई हिस्सों में बंद का असर साफ नजर आया, खासकर चमोली जिले में हालात बिल्कुल शांत लेकिन प्रभावी रहे।
गैरसैंण और आसपास के इलाके बंद के केंद्र रहे। यहां के व्यापारियों, टैक्सी यूनियन और स्थानीय संगठनों ने खुद आगे बढ़कर बाजार बंद रखने का फैसला लिया। व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने मेहलचौरी, माईथान, आगरचट्टी, पांडुवाखाल और नागाचूलाखाल सहित पूरे परिक्षेत्र में दुकानें न खोलने की घोषणा की। लोगों ने भी इस पहल को पूरा समर्थन दिया और सभी प्रतिष्ठान दिनभर बंद रहे। टैक्सी यूनियन ने भी अपने वाहन सड़कों से पूरी तरह हटा लिए, जिससे 150 से ज्यादा टैक्सियों के पहिए आज पूरे दिन थमे रहे।
इस बंद की अपील प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की ओर से भी की गई। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश कुमार बिष्ट ने कहा कि अंकिता के परिवार की मांग बिल्कुल न्यायसंगत है। उन्होंने साफ कहा कि बंद का उद्देश्य केवल न्याय की मांग को मजबूत करना है और इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि व्यापारियों ने भी खुद आगे आकर बंद में सहयोग देने की बात कही, क्योंकि वे चाहते हैं कि इस मामले में अब कोई देरी न हो।
चमोली जिले में बंद का असर और भी गहरा दिखा। गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, नंदानगर जैसे अधिकांश बाजार सुबह से ही बंद रहे। ज्योतिर्मठ में बंद का असर मिश्रित दिखा, लेकिन बाकी जगहों पर दुकानों के शटर नहीं उठे। गोपेश्वर में व्यापारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करते हुए कहा कि अगर सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पौड़ी, श्रीनगर और टिहरी जिले में भी बाजारों ने बंद का पूरा समर्थन दिया। पौड़ी और श्रीनगर में दोपहर तक लगभग पूरा बाजार बंद रहा। मेडिकल जैसी आवश्यक सेवाएं ही खुली रहीं।
वहीं रुद्रप्रयाग में भी लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद करके विरोध जताया और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग दोहराई। कई व्यापारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा ही अपराध रोकने का एकमात्र तरीका है।
टिहरी जिले के कई कस्बों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, नैनबाग, कामान्द, फकोट और कई ग्रामीण इलाकों में दुकानें बंद दिखीं। कुछ जगहों पर लोगों ने रैली निकालकर सरकार पर तेज कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश भी की।
उधम सिंह नगर के काशीपुर में बंद का असर मिला-जुला रहा। यहां कुछ दुकानें खुली रहीं जबकि कई व्यापारियों ने इस बंद को नैतिक समर्थन दिया।
वहीं देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, लक्सर, मसूरी, हल्द्वानी और खटीमा जैसे बड़े शहरों में बंद का खास असर नहीं दिखा। रोजमर्रा की गतिविधियां लगभग सामान्य रहीं।
आज का बंद एक बार फिर यह संदेश छोड़ गया कि प्रदेश के कई हिस्सों में लोग अब भी अंकिता को न्याय दिलाने की मांग पर मजबूती से खड़े हैं और चाहते हैं कि मामले की जांच बिना किसी दबाव और प्रभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ हो।
