उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत इस अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसके बाद यह तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।
संशोधन की मुख्य बातें:
सख्त दंडात्मक प्रावधान: अब विवाह और लिव-इन संबंधों में धोखाधड़ी, दबाव या बल प्रयोग करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की गई है।
पहचान छिपाने पर शादी होगी रद्द: यदि विवाह के समय किसी भी पक्ष ने अपनी पहचान को लेकर गलत तथ्य प्रस्तुत किए हैं, तो इसे अब विवाह निरस्तीकरण का आधार माना जाएगा।
लिव-इन संबंधों पर नया नियम: लिव-इन संबंध समाप्त होने की स्थिति में अब पंजीयक (Registrar) द्वारा ‘समाप्ति प्रमाण पत्र’ जारी किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रशासनिक बदलाव: कानून के सुचारू संचालन के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में ‘सचिव’ के स्थान पर अब ‘अपर सचिव’ को नामित किया गया है।
शब्दावली में सुधार: सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए कानून की अनुसूची-2 में प्रयुक्त “विधवा” शब्द को हटाकर अब “जीवनसाथी” शब्द से प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
पंजीकरण निरस्त करने की शक्ति: विवाह, तलाक या लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को निरस्त करने का अधिकार अब सीधे ‘पंजीयक जनरल’ को प्रदान किया गया है।
