आखिरकार पिजरें में कैद हुआ खौफ का पर्याय बना गुलदार,पार्षद भूपेंद्र जोशी ने ​वन विभाग की टीम को बोला थैक्यू

रानीधारा क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना गुलदार आखिकरकार पिजरें में कैद हो गया। गुलदार के आतंक के चलते लोग शाम होते ही घर में…

Ultimately, Guldar became synonymous with fear after being imprisoned in a cage, Councilor Bhupendra Joshi thanked the Forest Department team.

रानीधारा क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना गुलदार आखिकरकार पिजरें में कैद हो गया। गुलदार के आतंक के चलते लोग शाम होते ही घर में कैद होने पर मजबूर हो गए थे।सुबह जल्दी काम पर जाने वाले और मॉर्निग वॉक करने वाले लोग भी गुलदार के आतंक से खौफ में थे।


पार्षद भूपेंद्र जोशी ने इसके लिए वन विभाग की टीम को धन्यवाद दिया है। गौरतलब है​ कि लंबे समय से रानीधारा और पनियाउडियार मोहल्ले में गुलदार आए दिन टहलते हुए देखा जा रहा था।


इसके बाद पनियाउडियार वार्ड के पार्षद भूपेंद्र जोशी ने अल्मोड़ा व​न प्रभाग के प्रभागीय व​नाधिकारी दीपक सिंह से गुलदार को पकड़ने की मांग की थी। इसके बाद 26 दिसंबर को वन विभाग की टीम ने रानीधारा में सीमेंट कोठी के पास पिजरा लगा दिया था। कई बार गुलदार उस पिजरे के पास आया लेकिन फिर पिजरें से दूर चला गया था।


इसके बाद 30 दिसंबर को पिजरें को वहां से हटाकर डीएफओ आवासीय परिसर से लगे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के आवास के पास लगा दिया गया और आज सुबह 5 बजे आखिरकार पिजरें में कैद हो गए।
गुलदार के पिजरें में कैद मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गुलदार का रेस्कयू कर उसे जंगल में छोड़ दिया।

टीम में वन विभाग के अनुभाग अधिकारी अमित सिंह भैसोड़ा अनुभाग अधिकारी,सत्येंद्र सिंह नेगी,वन दरोगा भास्कर नाथ महंत,वन दरोगा ऋषभ सेमवाल,और विवेक तिवारी,वन बीट अधिकारी प्रकाश कुमार और राहुल मनराल,वन बीट अधिकारी नीरज नेगी, क्यूआरटी टीम के मनोज जोशी शामिल रहे।

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