सदन में इस विधायक ने किया अनशन का ऐलान,मचा हड़कंप

उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने उनकी विधानसभा में नेपाली मूल की एक…

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने उनकी विधानसभा में नेपाली मूल की एक महिला के ब्लॉक प्रमुख चुने का मामला उठाते हुए आमरण अनशन का ऐलान कर दिया।

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विधायक हरीश धामी ने RTI के तथ्यों के साथ दावा किया है कि निर्वाचित महिला के पिता नेपाली हैं और वहां उनकी जमीन भी है। उन्होंने पूछा ​है कि विदेशी मूल की महिला संवैधानिक पद पर कैसे चुन ली गई।
उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सीमांत क्षेत्र धारचूला का एक बेहद संवेदनशील मामला सदन की मुख्य कार्यवाही का केंद्र बन गया।

धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने ब्लॉक प्रमुख के निर्वाचन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने दो-टूक कहा कि यदि इस मामले की तुरंत उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो वे सदन के भीतर ही आमरण अनशन शुरू कर देंगे।


RTI के खुलासे से हड़कंप: “पिता और जमीन सब नेपाल में”
विधायक हरीश धामी ने सदन के पटल पर सूचना के अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों को रखते हुए दावा किया कि धारचूला की वर्तमान ब्लॉक प्रमुख मूल रूप से नेपाली मूल की हैं। उन्होंने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचित महिला के पिता नेपाली नागरिक हैं। नेपाल में उनकी पुश्तैनी जमीन और संपत्ति आज भी मौजूद है।उन्होंने सवाल उठाते हुए कह कि एक विदेशी मूल की नागरिक का भारत के संवैधानिक पद पर निर्वाचित होना पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।


भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने भी माना गंभीर मुद्दा
जनजातीय मामलों के विशेषज्ञ और वरिष्ठ भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ विषय है। चौहान ने मांग करते हुए कहा कि जिला प्रशासन को इस पूरे प्रकरण की सूक्ष्म जांच कर दो माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को देनी चाहिए।


आमरण अनशन की चेतावनी
विधायक हरीश धामी ने कहा कि सरकार इस मामले को हल्के में न ले। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस पर जांच के आदेश नहीं देती और रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और अनशन जारी रहेगा। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के इस मामले ने अब शासन से लेकर प्रशासननिक हलकों में तक हलचल पैदा कर दी है।

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