यूरोप के इस देश ने बनाया इतिहास, बन गया दुनिया का पहला देश जो पूरी तरह डिजिटल पेमेंट पर चल रहा है

बदलते वक्त के साथ पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी की रफ्तार तेज हो चुकी है। अब ज्यादातर काम मोबाइल और इंटरनेट के जरिए किए जा रहे…

बदलते वक्त के साथ पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी की रफ्तार तेज हो चुकी है। अब ज्यादातर काम मोबाइल और इंटरनेट के जरिए किए जा रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन पेमेंट का चलन सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला बदलाव बन चुका है। दुकानों से लेकर बस टिकट तक हर जगह अब डिजिटल पेमेंट किया जा रहा है। कई देश तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने यहां कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बड़े अभियान शुरू कर दिए हैं।

फिर भी दुनिया में आज भी करोड़ों लोग ऐसे हैं जो नकद में लेनदेन करना ही बेहतर समझते हैं। भारत जैसे देश में तो आज भी बहुत से लोग दुकान पर सामान खरीदते वक्त या टैक्सी का किराया देते वक्त कैश का ही इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों का भरोसा अब भी नोटों और सिक्कों पर टिका हुआ है। हालांकि अब यह सोच तेजी से बदल रही है।

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दुनिया में पहली बार यूरोप का देश स्वीडन पूरी तरह से कैशलेस बन चुका है। यह दुनिया का पहला देश है जहां अब कोई भी खरीदारी या भुगतान नकद में नहीं किया जाता। वहां हर लेनदेन मोबाइल या कार्ड से ही किया जाता है। दुकानों और मॉल में अब बोर्ड लगे दिखते हैं जिन पर साफ लिखा है कि यहां नकद भुगतान स्वीकार नहीं है।

स्वीडन की इस बड़ी सफलता के पीछे वहां के नागरिकों की सोच में आया बदलाव सबसे अहम रहा। आमतौर पर माना जाता है कि नई तकनीक को अपनाने में बुजुर्ग लोग पीछे रह जाते हैं लेकिन स्वीडन ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। वहां के बुजुर्ग अब मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से पेमेंट करते हैं और डिजिटल लेनदेन का हिस्सा बन चुके हैं। इस बदलाव में युवाओं के साथ साथ वरिष्ठ नागरिकों का सहयोग देश के लिए मिसाल बन गया है।

स्वीडन में यह डिजिटल क्रांति अचानक नहीं आई। इसकी शुरुआत साल 2012 में तब हुई जब देश के कुछ बड़े बैंकों ने मिलकर एक मोबाइल पेमेंट ऐप स्विश लॉन्च किया। इस ऐप ने वहां के लोगों की जिंदगी बदल दी। आज स्वीडन की लगभग पचहत्तर फीसदी आबादी इस ऐप का इस्तेमाल करती है। यानी करीब अस्सी लाख से ज्यादा लोग हर दिन इससे भुगतान करते हैं।

दस साल पहले तक वहां करीब चालीस प्रतिशत ट्रांजेक्शन नकद में होते थे लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। 2023 तक यह आंकड़ा घटकर एक फीसदी से भी कम रह गया था और 2025 तक आते आते नकद का इस्तेमाल लगभग खत्म हो गया। अब स्वीडन पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट करने वाला देश बन चुका है।

बैंकों ने अब एटीएम भी घटा दिए हैं और लोग अब अपनी जेब में नोट नहीं रखते। वहां बसों में टिकट से लेकर स्कूल फीस तक हर काम ऑनलाइन हो गया है। यहां तक कि सड़क किनारे छोटे विक्रेता भी डिजिटल ऐप से भुगतान लेते हैं।

स्वीडन का यह मॉडल अब बाकी देशों के लिए उदाहरण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत जैसे बड़े देश में भी डिजिटल भुगतान को इसी रफ्तार से बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले समय में कैश की जरूरत धीरे धीरे कम होती जाएगी। फिलहाल स्वीडन दुनिया का पहला देश बनकर इतिहास में दर्ज हो गया है जहां अब हर भुगतान सिर्फ डिजिटल होता है।