रावण दहन नहीं करते ये लोग, दशहरे पर मनाते हैं शोक और देते हैं दशानन को श्रद्धांजलि

भारत में दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जगह-जगह रावण दहन कर उत्सव मनाया जाता है। लेकिन…

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भारत में दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जगह-जगह रावण दहन कर उत्सव मनाया जाता है। लेकिन देश के कुछ हिस्सों में ऐसे भी समुदाय हैं जो इस दिन को शोक दिवस मानते हैं। उनका विश्वास है कि रावण केवल राक्षस नहीं था बल्कि एक महान पंडित, शिवभक्त और विद्वान राजा था। वे खुद को उसका वंशज मानते हैं और उसे सम्मान देने के लिए दशहरे पर उपवास रखते हैं, दीप जलाते हैं और उसकी पूजा करते हैं।

मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस मान्यता को मानने वाले लोग रहते हैं। मंदसौर में तो रावण का मंदिर भी है, क्योंकि वहां रावण की पत्नी मंदोदरी की जन्मभूमि मानी जाती है। इसलिए स्थानीय लोग रावण को जमाई मानकर उसकी पूजा करते हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में कुछ ब्राह्मण समुदाय उसे शिव का भक्त और ज्ञानी ब्राह्मण मानकर श्रद्धांजलि देते हैं। कर्नाटक के कोलार जिले में दशहरे के दिन रावण के दहन की बजाय उसकी विद्वता और चरित्र की चर्चा की जाती है। आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में लोकगीतों और कविताओं के जरिए रावण को साहसी राजा के रूप में याद किया जाता है।

गोंड जनजाति और कुछ दसपुरिया ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज बताते हैं। उनके लिए दशहरा उत्सव का नहीं बल्कि रावण की मृत्यु और बलिदान का दिन होता है। धार्मिक ग्रंथों में भी रावण को शिव का परम भक्त और “शिव तांडव स्तोत्र” का रचयिता माना गया है। हालांकि उसके द्वारा सीता हरण को उसकी सबसे बड़ी गलती माना जाता है, लेकिन कई लोग उसे पूरी तरह से खलनायक मानने से इनकार करते हैं।

इन समुदायों का कहना है कि रावण को केवल बुराई का प्रतीक मानना एक पक्षीय सोच है। उनका मानना है कि रावण में विद्या, भक्ति और शक्ति का संगम था और उसे सिर्फ नकारात्मक रूप में दिखाना उचित नहीं है। यही वजह है कि हर साल दशहरे पर जब देशभर में उसके पुतले जलाए जाते हैं, तब ये लोग उसका विरोध करते हैं और उसे स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

रावण का चरित्र भारतीय परंपरा में जटिल और बहुआयामी है। एक ओर वह रामायण का खलनायक है, दूसरी ओर वह विद्वान और भक्त राजा भी माना जाता है। यही विविध दृष्टिकोण भारत की धार्मिक सहिष्णुता और विचारों की गहराई को दर्शाते हैं।