ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित द विज़डम ट्री स्कूल इन दिनों गंभीर वित्तीय आरोपों के कारण सुर्खियों में है।ग्रेटर नोएडा वेस्ट का द विज़डम ट्री स्कूल बड़े वित्तीय विवाद में फंसा, आयकर विभाग ने 125 करोड़ की इमारत को बेनामी बताया।
आयकर विभाग के कानपुर स्थित बेनामी प्रॉपर्टी विंग ने स्कूल की लगभग 125 करोड़ रुपये की विशाल इमारत को बेनामी संपत्ति घोषित कर दिया है। फिलहाल स्कूल की दिनचर्या पहले की तरह ही चल रही है और कक्षाएं जारी हैं, लेकिन कार्रवाई के बाद पूरे कैंपस में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अभिभावक भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं।
इस विवाद की शुरुआत करीब छह महीने पहले उस वक्त हुई, जब आयकर विभाग को एक गुमनाम शिकायत मिली। आरोप लगाया गया कि स्कूल की इमारत तैयार करने में भारी मात्रा में काले धन का इस्तेमाल हुआ है। शिकायत को आधार बनाकर विभाग ने दस्तावेज, बैंक लेनदेन और जुड़े लोगों के बयान खंगाले। जांच आगे बढ़ने पर कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने मामले को और गंभीर बना दिया।
जांच में जो बड़ा खुलासा सामने आया, उसके अनुसार स्कूल प्रोजेक्ट में सीधे निवेश नहीं किया गया बल्कि तीन फर्जी कंपनियों के जरिए मोटी रकम डाली गई। आरोप है कि अलग-अलग व्यापारियों से नकद पैसा लेकर उसे इन कंपनियों की ओर से लोन या निवेश दिखाया गया। जांच एजेंसियों के पास उन लोगों के बयान भी मौजूद हैं जिन्होंने नकद देने की बात स्वीकारी है।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि स्कूल का निर्माण सतनाम बिल्डर्स ने किया था। बिल्डर ने अपने परिवार और कारोबारी साथियों के साथ मिलकर द विज़डम ट्री स्कूल फाउंडेशन नाम की कंपनी बनाई और उसी के नाम पर संचालन दिखाया। खास बात यह रही कि बिल्डर खुद इस कंपनी का डायरेक्टर भी रहा, जिससे हितों के टकराव और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि इसके अन्य कौन-कौन से प्रोजेक्ट इस तरह की संदिग्ध फंडिंग से जुड़े हुए हैं।
करीब 15 हजार वर्ग मीटर में फैले इस स्कूल परिसर की इमारत चार मंजिला है और आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसकी बाजार कीमत लगभग 125 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इतनी बड़े प्रोजेक्ट में लगाए गए निवेश की असल स्रोत को लेकर ही सबसे बड़ा विवाद खड़ा हुआ है।
जांच में कई दस्तावेज और गवाहियाँ ऐसी मिलीं, जिनसे संकेत मिला कि बड़ी मात्रा में कैश को घुमाकर इस प्रोजेक्ट में लगाया गया था। कई निवेशकों ने तो यह भी माना कि उन्होंने नकद पैसा दिया था जिसे कागजों में लोन या निवेश बताया गया। इन्हीं आधारों पर आयकर विभाग ने 27 मार्च को आधिकारिक नोटिस जारी कर इमारत को बेनामी संपत्ति घोषित कर दिया।
हालांकि अंतिम कुर्की आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन विभाग तैयारी में जुटा हुआ है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में इस केस में और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर स्कूल में पढ़ रहे लगभग 700 छात्रों पर पड़ सकता है। अभिभावकों की चिंता है कि अगर स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होती है तो बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि फिलहाल कक्षाओं का संचालन सामान्य है और जांच जारी है। अगर भविष्य में कोई बड़ी कार्रवाई होती है तो छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कराने की व्यवस्था की जाएगी ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
वहीं स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। जब बातचीत की कोशिश हुई तो गार्डों ने मिलने से साफ मना कर दिया। इससे अंदाजा लग रहा है कि प्रबंधन खुद भी इस विवाद के अगले चरण को लेकर आशंकित है और स्कूल पर कुर्की की तलवार लटकती दिखाई दे रही है।

