तिरुपति लड्डू घोटाले में SIT का बड़ा खुलासा, मिलावटी घी सप्लाई के पीछे छिपा रिश्वत का खेल उजागर

अमरावती से सामने आई जांच रिपोर्ट ने तिरुमला मंदिर में मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़े विवाद को नई दिशा दे दी है। SIT द्वारा…

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अमरावती से सामने आई जांच रिपोर्ट ने तिरुमला मंदिर में मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़े विवाद को नई दिशा दे दी है। SIT द्वारा दायर की गई चार्जशीट में यह बात खुलकर सामने आई है कि जिस मोबाइल नंबर से घी सप्लायरों को धमकाने और पैसे की मांग करने के लिए फोन किए गए थे, वह नंबर कभी पूर्व सांसद और टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष वाई.वी. सुब्बा रेड्डी के आधिकारिक संपर्क में शामिल रहा है। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि सत्ता से जुड़े लोगों की कथित संलिप्तता का भी बन गया है।

चार्जशीट में दर्ज विवरण बताता है कि YSRCP शासनकाल के दौरान मंदिर में भारी मात्रा में ऐसा घी पहुंचाया गया, जिसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे। इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी कडुरु चिन्नप्पन्ना का नाम सबसे प्रमुख रूप से सामने आया है। आरोप है कि चिन्नप्पन्ना टीटीडी में अध्यक्ष के नजदीकी बताकर मंदिर की गतिविधियों में दखल देता था और सप्लाई से जुड़े ठेकेदारों को फोन करके रिश्वत की मांग करता था। जांच से यह भी साफ हुआ है कि आरोपित नंबर का इस्तेमाल न सिर्फ बातचीत के लिए बल्कि हवाला के जरिए रकम वसूलने में भी किया गया।

एसआईटी ने पाया कि चिन्नप्पन्ना सप्लायरों को दिल्ली बुलाकर उनसे सीधे सौदेबाजी करता था। रिपोर्ट में उल्लेख है कि भोले बाबा डेयरी के डायरेक्टर को उसने घी सप्लाई जारी रखने की शर्त पर 25 रुपये प्रति किलो की रिश्वत मांगने के लिए बुलाया था। इसी तरह प्रीमियर एग्रीफूड्स के एमडी को भी बुलाकर पैसे की मांग की गई और बाद में हवाला चैनल के माध्यम से लाखों रुपये लिए गए। चिन्नप्पन्ना ने यह सारी गतिविधियां उसी नंबर से कीं, जिसका लिंक सुब्बा रेड्डी के आधिकारिक दस्तावेजों से जुड़ा पाया गया।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि चिन्नप्पन्ना ने टीटीडी के तत्कालीन खरीद अधिकारी से सप्लायरों की जानकारी हासिल की थी। इसी जानकारी की आड़ में वह कंपनियों पर दबाव बनाता और घी सप्लाई से जुड़े ठेके अपने हिसाब से प्रभावित करने की कोशिश करता था। इस दौरान एक सवाल लगातार उभरता रहा कि जब 2022 में सप्लायरों में से एक ने सुब्बा रेड्डी से यह शिकायत की कि उनका तथाकथित पीए उनसे पैसे मांग रहा है, तब तत्कालीन अध्यक्ष ने इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। शिकायत के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब न देना भी अब जांच के दायरे में आ गया है।

घटना का एक दिलचस्प पहलू यह है कि 2018 में जगन मोहन रेड्डी ने सुब्बा रेड्डी का आधिकारिक लेटरहेड ट्विटर पर साझा किया था। उसी लेटरहेड पर वही फोन नंबर दर्ज था, जिसे आज ट्रूकॉलर पर चिन्नप्पन्ना के नाम पर दिखाया जा रहा है और कई टीटीडी अधिकारियों के फोन में यह ‘PS to Chairman’ के नाम से सेव पाया गया। यह तथ्य आरोपों को और मजबूती देता है कि दोनों के बीच संबंध सिर्फ पुराने परिचय भर नहीं थे, बल्कि कामकाज में भी गहरा जुड़ाव था।

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या तिरुमला मंदिर में मिलावटी घी सप्लाई करने वाली इस साजिश का असली मास्टरमाइंड सामने आ पाएगा। SIT की चार्जशीट ने कई महत्वपूर्ण लिंक जोड़ दिए हैं, लेकिन असली जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी या नहीं, यह आने वाले समय में तय होगा।

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