खनन माफिया के सिंडिकेट को पकड़ने के लिए पुलिस ने जब पकड़ तेज की तो आरोपियों ने बहुत ही सफाई से सबसे पहले व्हाट्सएप चैट डिलीट कर दी। उसमें से ग्रुप की भी चैट डिलीट हो गई जिस पर सभी की आपस में बातचीत होती थी।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने फोन को सर्विलांस की टीम को सौपा है। वह डाटा को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं जो फोन लॉक है उनका लॉक खोलने का भी प्रयास किया जा रहा है। यदि उनके लॉक को ब्रेक किया गया तो डाटा भी उड़ सकता है। इसलिए पुलिस बहुत ही सतर्कता के साथ सभी सबूत एकत्र कर रही है।
उत्तराखंड से रेता बजरी के ओवरलोड ट्रकों को आइएसटीपी (अंतर राज्यीय पारगमन पास) की चोरी कर अवैध रूप से शहर में लाया जाता है। जिससे माफिया को मोटा मुनाफा होता है।
इस सिंडिकेट को तोड़ने के लिए जब खनन माफिया पर शिकंजा कसा गया तो सभी बौखला गए। 15 जनवरी को उत्तराखंड के ओर से आइएसटीपी चोरी कर आ रहे ट्रकों को जांच टीम ने रोका तो उन्होंने टीम को ही ट्रकों से कुचलने का प्रयास किया। करीब 30-35 ट्रक एक साथ आए और टीम को दौड़ाते हुए निकल गए।
सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और ट्रक चालकों का पीछा किया गया और आरोपियों को लगा कि वह पकड़े जाएंगे तो सभी ट्रक इधर-उधर छोड़कर फरार हो गए। उन्होंने अपने मालिकों से बात की तो उन्होंने सबसे पहले व्हाट्सएप चैट डिलीट करने की बात कही। इसके बाद अधिकांश ने चैट डिलीट कर दी।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जब आरोपियों के फोन चेक किया गया तो उसमें कुछ फोन में चैट डिलीट हो गई थी और बाकी फोन लॉक थे। सर्विलांस टीम ने डाटा रिकवर करने के लिए सभी फोनों को अपने पास रख लिया है।
आपको बता दे कि इस मामले में पुलिस अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसमें 19 चालक व पांच लोकेटर शामिल है। इसके साथ ही 37 ट्रकों समेत कुल 40 वाहनों को जब्त किया है।
पुलिस की जांच में यह सामने आया कि डंपर चलने का खेल नंबर प्लेट बदलकर किया जा रहा था।
कई डंपर स्कूटी और ई रिक्शा के नंबर प्लेट लगाकर दौड़ा रहे थे तो कई नंबर प्लेट के नंबर को किसी न किसी तरह से छुपा दिया गया जिससे कई बार जब चालान किया जाता है तो वह उन ट्रकों का नहीं होता है।
पुलिस ने जिन ट्रकों को जब्त किया है उनमें भी कई ट्रक ऐसे हैं जो स्कूटी और ई-रिक्शा की नंबर प्लेट पर चल रहे हैं। तो कई की नंबर प्लेट के नंबर छिपे हैं। पुलिस ने सभी की जानकारी एआरटीओ से मांगी है।
