आज के दौर में सोशल मीडिया कितना असरदार हो चुका है, यह बताने की जरूरत नहीं रह गई है। लेकिन यहां दिखने वाली वीडियो सच हैं या अफवाह यह समझना पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है। वीडियो चंद मिनटों में हर प्लेटफॉर्म पर फैल जाते हैं और उसके बाद जांच का सारा दबाव पुलिस पर आ जाता है। इसलिए लोगों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी वीडियो को लाइक या शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर परखें, क्योंकि लापरवाही जेल तक पहुंचा सकती है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर किसी को धमकाना, आत्महत्या की धमकी देना या फिर व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए वीडियो डालना आम होता जा रहा है। युवा भी हथियारों के साथ वीडियो बनाकर अपलोड कर रहे हैं। स्टंटबाजी, जोखिम भरे काम और लाइक-व्यूज के लिए की गई हरकतें पुलिस के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। कई बार ऐसे वीडियो किस जगह से बनाए गए हैं, यह पता लगाना भी पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है।
सोशल मीडिया पर आने वाली वीडियो की सत्यता स्पष्ट न हो तो पुलिस को जांच में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पुलिस भी मानती है कि एडवांस टेक्नोलॉजी के फायदे हैं तो नुकसान भी। अच्छी बातें भी वायरल होती हैं, लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है जब लोग बिना जांचे-परखे गलत पोस्ट आगे भेज देते हैं। अक्सर देखा गया है कि झूठी खबरें ही सबसे तेजी से फैलती हैं और इसका खामियाज़ा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
एसएसपी अजय सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोग किसी भी संदिग्ध पोस्ट को देखने के बाद उसकी सत्यता अपने स्तर पर जरूर जांचें। गलत पोस्ट को आगे बढ़ाने वालों के खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई भी की गई है। हर दिन सैकड़ों पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली जाती हैं और जब कोई भ्रामक वीडियो वायरल हो जाती है तो उसे हटवाना भी पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है।
उन्होंने बताया कि दून पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहती है और हर थाने के स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। कई लोग अनजाने में पोस्ट कर देते हैं, ऐसे लोगों को समझाया जाता है। लेकिन जो युवा जानबूझकर गलत कंटेंट को शेयर करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
