सरकारी स्कूलों को बंद करने की हो रही साजिश,शिक्षा के लिए बजट देने के इच्छुक नहीं है सरकार, संवाद में हुआ शिक्षा के लिए हुए संघर्ष पर मंथन

कई शिक्षक संगठनों व पदाधिकारियों ने भी लिया हिस्सा अल्मोड़ा। उत्तराखंड आरटीई फोरम की ओर से अल्मोड़ा में हुए शिक्षक संवाद में सार्वजनिक शिक्षा को…

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कई शिक्षक संगठनों व पदाधिकारियों ने भी लिया हिस्सा

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड आरटीई फोरम की ओर से अल्मोड़ा में हुए शिक्षक संवाद में सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर या बंद करने की कोशिश पर सभी जानकारों ने गहरी चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि मात्र दो प्रतिशत सेस (उपकर) से चलने वाली शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए सरकार कोई ठोस प्रयास नहीं करती और सरकार अपनी ओर से इसमें बहुत कम पैंसा खर्च करती है। सभी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था बनाने के लिए शिक्षा में अधिक बजटीय प्रावधान करने के साथ ही सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को बचाने की जरूरत जताई। वक्ताओं ने आरटीई के नाम पर प्राईवेट विद्यालयों में 25 प्रतिशत सरकारी स्कूलों के बच्चो को प्रवेश देने की योजना भी सरकारी स्कूलों को बंद करने की एक साजिश करार दिया।
इस मौके पर शिक्षा के वर्तमान स्तर तक पहुंचने की संघर्षगाथा पर मंथन किया गया। शिक्षक नेता रहे पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि अल्प वेतन और कई परेशानियों के लिए संघर्ष करने के बाद आज स्थिति यहां तक पहुंची है लेकिन अब शिक्षक संघ भी वेतन भत्तों की लड़ाई में उलझ कर रहे गई है। उन्होंने कहा कि अभी लड़ाई बाकी है इसलिए सरकार सोचे ना सोचे शिक्षकों और​ शिक्षा के लिए कार्य करने वाले संगठनों को इसके लिए सोचना चाहिए।
कार्यशाला को वरिष्ठ अधिवक्ता पीसी तिवारी, आरटीई फोरम के संयोजक रघु तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद थापा,चमोली से मनोज साह, राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश बहुगुणा, प्रधानाचार्य नीरज पंत, नीलिमा भटट आदि ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि आरटीई लागू होने के बाद भी ​इस दिशा कई महत्वपूर्ण कार्य और करने हैं। वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी जैसे बढ़े ढांचे को सरकार लगातार समाप्त कर रही है। वहीं कम छात्रसंख्या का बहाना बनाकर विद्यालयों को बंद करने की सा​जिश की जा रही है। यह साजिश सार्वजनिक शिक्षा को खत्म कर देगी। वक्ताओ ने चुनावों में शिक्षा के मुद्दों के गौण रहने पर भी चिंता जाहिर की साथ ही आरटीई के नाम पर प्राईवेट विद्यालयों में 25 प्रतिशत सरकारी स्कूलों के बच्चो को प्रवेश देने की योजना भी सरकारी स्कूलों को बंद करने की एक साजिश ही है। इसके लिए शिक्षक संगठन अपने स्तर से लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि एक दिन सभी सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे कहीं ना कहीं यह एक साजिश का हिस्सा है। सभी ने एक स्वर में अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा को 18 वर्ष तक रखे जाने की मांग की। कार्यशाला का संचालन जीआईसी कमलेश्वर के प्रधानाचार्य नीरज पंत ने किया।
कार्यक्रम में राजेन्द्र जोशी, कल्याण मनकोटी,दिगंबर गैड़ा,पुष्कर सिंह, दाताराम,कविता गैड़ा,प्रियंक लोहनी,हेम जोशी,केवल प्रसाद,गोविंद सिंह महरा, शशि शेखर,रेनू नेगी सहित प्रदेश भर से आये 100 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।