जौलजीबी से बूम तक लगभग 150 किमी लम्बा चुनौतीपूर्ण सफर तय करेगा दल
रानीखेत: सशस्त्र सीमा बल सीमान्त मुख्यालय गनियाद्योली के तत्वावधान में आगामी 16 से 19 मार्च तक महाकाली नदी के जलमार्ग पर चार दिवसीय अंतर-सीमांत व्हाइट वॉटर राफ्टिंग अभियान तरणी का आयोजन होने जा रहा है।
इसमें बल के 6 विभिन्न सीमांतों के 36 जांबाज अधिकारी, कार्मिक हिस्सा लेकर जौलजीबी से बूम तक लगभग डेढ सौ किमी लम्बा चुनौतीपूर्ण सफर तय करेंगे। अभियान के माध्यम से जवानों की परिचालन क्षमता और स्विफ्ट वाटर रेस्क्यू’ कौशल को निखारा जाएगा।
इस दौरान दल द्वारा तट पर बसे समुदायों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढाने एवं स्वच्छ भारत अभियान और नदी संरक्षण का संदेश स्थानीय ग्रामीणों तक पहुँचाया जाएगा। मुख्य अभियान की पूर्ण सफलता और सुरक्षा हेतु 9 से 14 मार्च तक गोरी नदी के चुनौतीपूर्ण जलमार्ग पर गहन पूर्वाभ्यास किया जा रहा है।
सीमान्त मुख्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया गया है कि सीमान्त अंतर्गत बल की 55वीं वाहिनी पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित यह अभियान जौलजीबी स्थित सीमा चौकी से प्रातः नौ बजे शुरू होगा।
जिसमें बल के 6 विभिन्न सीमांतों के 36 जांबाज अधिकारी, कार्मिक हिस्सा ले रहे हैं। चार दिवसीय अभियान में यह दल जौलजीबी से 57वीं वाहिनी सीमा चौकी बूम तक लगभग डेढ सौ किमी का चुनौतीपूर्ण सफर तय करेगा, जिसमें ‘चुका’ जैसे खतरनाक ‘रैपिड्स’ पर जवानों के मजबूत इरादों और ट्रेनिंग की परीक्षा होगी।
महाकाली नदी के कठिन जलमार्ग में ट्रेनिंग के माध्यम से जवानों की परिचालन क्षमता और स्विफ्ट वाटर रेस्क्यू’ कौशल को निखारा जाएगा, ताकि वे किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव कार्यों के लिए तैयार रहें।
इसके अतिरिक्त यात्रा के दौरान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और नदी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण का संदेश स्थानीय ग्रामीणों तक पहुँचाया जाएगा। इससे नदी तट पर बसे समुदायों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
यह चुनौतीपूर्ण सफर अंततः एसएसबी की अदम्य टीम भावना, उच्च कोटि के आपसी तालमेल और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
मुख्य अभियान की पूर्ण सफलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु 9 से 14 मार्च तक गोरी नदी के चुनौतीपूर्ण जलमार्ग पर गहन पूर्व-अभ्यास आयोजित किया जा रहा है।
इस पूर्वाभ्यास के माध्यम से प्रतिभागी अधिकारी एवं जवान काली नदी के अत्यंत कठिन ‘रैपिड्स’ और ‘चुका’ जैसे खतरनाक मोड़ों का सामना करने के लिए स्वयं को तकनीकी रूप से तैयार कर रहे हैं।
