अल्मोड़ा में बनी शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट रूपांतरण हुई रिलीज, मानसिक स्वास्थ्य पर दे रही संवेदनशील संदेश

email image link अल्मोड़ा (उत्तरा न्यूज़ डेस्क):उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की पृष्ठभूमि पर शूट की गई शॉर्ट फिल्म ‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’ रिलीज हो गई है। यह…

Short film project adaptation made in Almora released, giving sensitive message on mental health

अल्मोड़ा (उत्तरा न्यूज़ डेस्क):
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की पृष्ठभूमि पर शूट की गई शॉर्ट फिल्म ‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’ रिलीज हो गई है। यह फिल्म मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बेहद गंभीर और संवेदनशील विषय ‘सिज़ोफ्रेनिया’ पर आधारित है। फिल्म में इस जटिल विषय को बहुत ही सरल, सटीक और मार्मिक तरीके से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया है।


स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने बिखेरा अभिनय का जलवा
फिल्म की पूरी शूटिंग अल्मोड़ा जिले के विभिन्न स्थानों पर की गई है। इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ महंतगांव जूनियर हाईस्कूल के बच्चों और अध्यापकों ने भी शानदार अभिनय किया है। स्कूली बच्चों ने अपने किरदारों को इतने प्रभावशाली ढंग से निभाया है कि फिल्म में एक स्थानीय जुड़ाव और वास्तविकता का सीधा अहसास होता है।

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मुख्य भूमिकाओं में अल्मोड़ा और हल्द्वानी क्षेत्र से जुड़े नीरज पंत, विपुल जोशी, रवि प्रसाद और हर्षित दुर्गापाल नजर आ रहे हैं, जिनके अभिनय को दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।


दवाइयों के साथ समझ और सकारात्मक माहौल भी जरूरी
‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’ की कहानी मुख्य रूप से सिज़ोफ्रेनिया नामक मानसिक विकार के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का मजबूत प्रयास किया गया है कि मानसिक समस्याओं का समाधान केवल दवाइयों तक ही सीमित नहीं है। मरीज के लिए परिवार और समाज की समझ, उनका सहयोग और एक सकारात्मक माहौल भी रिकवरी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


सीमित संसाधनों में बेहतरीन निर्देशन
इस उद्देश्यपूर्ण शॉर्ट फिल्म के लेखक और निर्देशक विपुल जोशी हैं। शानदार सिनेमेटोग्राफी का कार्य दीपांशु कुमार ने संभाला है, जबकि कुशल एडिटिंग नरेंद्र धाकड़ द्वारा की गई है। फिल्म की तकनीकी टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद एक बेहद प्रभावी प्रस्तुति दी है। इसके निर्माण में त्रिभुवन गिरी महाराज, गौरव बंब और जितेंद्र गोस्वामी का विशेष सहयोग रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार की गई यह फिल्म न केवल दर्शकों को बांधे रखती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे जरूरी विषय पर समाज में जागरूकता भी फैला रही है।

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