राजस्थान के नागौर शहर से ट्रैफिक पुलिस की एक बेहद हैरान करने वाली और अजब गजब कार्रवाई सामने आई है। यहां पुलिस ने एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार (ईवी) का प्रदूषण चालान काट दिया है जिसमें न तो इंजन होता है और न ही साइलेंसर।
इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर मजे लेते हुए सवाल उठा रहे हैं।
बहस के बाद काटा 1500 का चालान
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला 6 अप्रैल का है। हालांकि ये मामला शुक्रवार को चर्चाओं में आया। नागौर के कृषि मंडी तिराहे पर एएसआई रामकुमार अपनी टीम के साथ वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने टाटा कंपनी की एक इलेक्ट्रिक कार को रोका।
कार की खिड़कियों पर काली जालियां लगी हुई थीं। जब पुलिस ने उन जालियों को हटवाया, तो कार चालक और एएसआई के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस ने काली जाली के नाम पर 200 रुपये का चालान तो काटा ही, लेकिन साथ में 1500 रुपये का प्रदूषण उल्लंघन का भी चालान थमा दिया।
ड्राइवर की एक न सुनी वीडियो हुआ वायरल
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस ने अपनी जिद और गुस्से में आकर यह कार्रवाई की है। कार चालक पुलिसकर्मियों को बार बार समझाता रहा कि यह एक इलेक्ट्रिक कार है और इसमें प्रदूषण सर्टिफिकेट (पीयूसी) की कोई आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी।
जब इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, तो लोगों ने पुलिस को ट्रोल करना शुरू कर दिया और इसे ‘एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी’ वाला मामला बताने लगे।
पुलिस ने मानी गलती चालान होगा कैंसिल
मामला तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर फजीहत होने के बाद अब ट्रैफिक पुलिस अपनी गलती मान रही है। नागौर में इस तरह का यह पहला मामला है। पुलिस अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा है कि कार की जालियां हटाने को लेकर चालक से बहस हो रही थी और इसी आपाधापी में भूलवश प्रदूषण का चालान कट गया।
विभाग ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच कराई जा रही है और सिस्टम से इस गलत चालान को कैंसिल कर दिया जाएगा। फिलहाल यह वाकया पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।


