राज्यभर के आयुष अस्पतालों में रोगी पंजीकरण एक मार्च से ऑनलाइन, इन व्यवस्थाओं पर भी होगा जोर

देहरादून: उत्तराखंड सरकार अब आयुष चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। उद्देश्य यह है कि ज्यादा…

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देहरादून: उत्तराखंड सरकार अब आयुष चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा मरीज आयुष पद्धति से उपचार का लाभ ले सकें। फिलहाल कई आयुष अस्पतालों की स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही, जिसके चलते इन्हें दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसी प्रयास के तहत आयुष सचिव रंजना राजगुरु ने विभागीय अधिकारियों के साथ व्यापक समीक्षा बैठक की। बैठक में तय किया गया कि आगामी 1 मार्च से राज्य के आयुष अस्पतालों में मरीजों का पंजीकरण ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को समय पर लागू करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी बजट, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जारी कार्यों और सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस के लिए स्वीकृत चार लाख रुपये से चल रहे रिनोवेशन कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव ने यह भी कहा कि दवाओं के स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अपडेट किए जाएं, जिन्हें आगे चलकर ऑनलाइन पोर्टल में स्थानांतरित किया जाएगा।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि हर महीने कम से कम आठ अस्पतालों का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि व्यवस्थाओं में सुधार जल्द दिखाई दे सके। साथ ही यह भी तय किया गया कि जिले के सभी कार्मिकों की गतिविधियां और कार्यप्रगति एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रैक की जाए।

औषधि निरीक्षकों को फार्मेसियों का लगातार निरीक्षण करने और सैम्पल एकत्र कर उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में आयुष कर्मियों के युक्तिकरण और नियमित ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया, ताकि उपलब्ध विशेषज्ञों की सेवाओं का पूरा उपयोग जनता तक पहुंच सके।

बैठक में उन आयुष अस्पतालों की भी समीक्षा की गई, जिनमें बेड की सुविधा मौजूद है। इनमें मुनिकीरेती, कोटद्वार, झाझरा, बडकोट और चंबा के अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों के उन्नयन और उपकरणों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही आई गॉट कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत 1909 कार्मिकों के प्रशिक्षण और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए गए।

अंत में सचिव ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में नए अस्पतालों के निर्माण प्रस्तावों की समीक्षा की और जिलों से भेजे गए कार्मिकों के अचल संपत्ति विवरणों की भी जांच की।

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