नीम को भारत में सिर्फ एक साधारण पेड़ नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ी अनगिनत खूबियों का भंडार माना जाता है। बरसों से इसकी पत्तियां, छाल और रस तरह-तरह के घरेलू उपचारों में इस्तेमाल होते आए हैं।
अब एक नई रिसर्च ने नीम के महत्व को और मजबूत कर दिया है। अध्ययन में खुलासा हुआ है कि नीम में मौजूद एक खास तत्व अग्नाशय कैंसर की कोशिकाओं की बढ़त को धीमा कर सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज आने वाले समय में कैंसर से बचाव की दिशा में नई संभावनाएं खोल सकती है। हालांकि इसे फिलहाल इलाज मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन इससे नीम के औषधीय गुणों पर भरोसा और बढ़ा है।
स्टडी में क्या सामने आया : अमेरिका के टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी हेल्थ साइंसेज सेंटर के वैज्ञानिकों ने नीम में पाए जाने वाले निम्बोलाइड नामक कंपाउंड पर अध्ययन किया। यह रिपोर्ट साइंटिफिक रिपोर्ट्स नाम की जर्नल में प्रकाशित हुई है। शोध के दौरान पाया गया कि यह तत्व अग्नाशय कैंसर कोशिकाओं की तेजी को रोकने में मददगार हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भविष्य में कैंसर प्रिवेंशन के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकती है।
कैंसर कोशिकाओं के फैलाव को धीमा करने की क्षमता : अध्ययन में यह भी देखने को मिला कि निम्बोलाइड कैंसर कोशिकाओं के फैलने की क्षमता को काफी कम कर देता है। अग्नाशय कैंसर को बेहद तेजी से बढ़ने वाला कैंसर माना जाता है, इसलिए ऐसा कोई तत्व जो इसकी रफ्तार को रोक सके, विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण यह शोध काफी चर्चा में है।
स्वस्थ कोशिकाओं पर कम असर : इस रिसर्च की दिलचस्प बात यह रही कि नीम का यह कंपाउंड कैंसर कोशिकाओं को प्रभावित करता है, लेकिन सामान्य और स्वस्थ कोशिकाओं को खास नुकसान नहीं पहुंचाता। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि आगे के अध्ययनों में भी ऐसे नतीजे दोहराए गए, तो यह भविष्य में सुरक्षित उपचार की दिशा दिखा सकता है।
नीम के औषधीय गुण: नीम में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में इसे त्वचा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण से जुड़ी कई समस्याओं को ठीक करने में उपयोग किया जाता आया है। नीम शरीर को अंदरूनी तौर पर मजबूत बनाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में भी सहायक हो सकता है।
अभी रिसर्च जारी रहने की जरूरत : विशेषज्ञों के अनुसार यह स्टडी शुरुआती चरण की है और अभी इंसानों पर बड़े स्तर पर शोध किया जाना बाकी है। इसलिए सिर्फ नीम पर निर्भर होकर कैंसर से बचाव संभव नहीं माना जा सकता। संतुलित जीवनशैली, पौष्टिक भोजन और नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी हैं। हालांकि इस अध्ययन ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि नीम भविष्य में कैंसर प्रिवेंशन की नई उम्मीद बन सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी इलाज, आहार परिवर्तन या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

