राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन:विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े समसामयिक और भविष्यपरक विषयों पर हुआ मंथन

अल्मोड़ा स्थित मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में 13 फरवरी 2026 से 21वें राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय प्रमुखों के सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े…

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अल्मोड़ा स्थित मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में 13 फरवरी 2026 से 21वें राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय प्रमुखों के सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े समसामयिक और भविष्यपरक विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।


इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम), कोलकाता के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यू-कॉस्ट) द्वारा मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में किया गया है।


तीन दिवसीय इस सम्मेलन में चार तकनीकी सत्रों के माध्यम से देशभर से आए विज्ञान संग्रहालय प्रमुख, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और विशेषज्ञ विज्ञान संग्रहालयों के भविष्य की दिशा पर मंथन कर रहे हैं।

इस सत्र में विज्ञान केंद्र के एक्सपेरिमेंटल पार्क, साइंस सेंटर और थिएटर आधारित प्रस्तुतियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि विज्ञान संग्रहालयों को अब पारंपरिक प्रदर्शनों तक सीमित न रहकर अनुभवात्मक, पारदर्शी और संवादात्मक ज्ञान केंद्रों के रूप में विकसित करना होगा।

विशेषज्ञों ने विज्ञान को खेल-खेल में सिखाने, 3-डी जैवविविधता प्रदर्शनों में निहित अपार संभावनाओं, तथा विज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझाने की आवश्यकता पर बल दिया। स्टेम (STEM) लैब, क्षमता निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विज्ञान के समन्वय, खोज म्यूजियम में विज्ञान और कला के नवाचारी संयोजन, तथा युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने जैसे विषय इस सत्र के केंद्र में रहे।
सत्र के दौरान वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि शोध परियोजनाओं में विज्ञान विषयों को समाज से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही वर्चुअल रियलिटी (VR) की काल्पनिक दुनिया, डाटा कोडिंग, और उभरती डिजिटल तकनीकों के भविष्य पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि ये तकनीकें नई पीढ़ी को स्वरोजगार, स्टार्टअप संस्कृति और विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित करियर की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


अन्य राज्यों से आए वैज्ञानिकों एवं संग्रहालय प्रमुखों ने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल युवाओं में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि विज्ञान संचार को सशक्त बनाकर नवाचार आधारित विकास को भी गति देते हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन के निष्कर्ष विज्ञान संग्रहालयों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करेंगे और विज्ञान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में एक ठोस रोडमैप प्रस्तुत करेंगे।

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