महायुद्ध की ओर मिडिल ईस्ट: ईरान में जमीनी जंग की तैयारी कर रहे US-इजरायल

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उत्तरा न्यूज़ डेस्क:
मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव अब पूरी तरह से एक विनाशकारी महायुद्ध में बदलता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ बड़े जमीनी और हवाई हमलों (ग्राउंड ऑपरेशन) की रणनीति बना रहे हैं,वही अभी तक ईरान के प्रतिरोध को देखकर लगता है कि ईरान जंग में भारी पड़ रहा है। हालांकि सुपरवार कहे जाने देश अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उसके सहयोगी इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी अब कदम पीछे खींचना मुश्किल हो गया है।


अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने हमले के शुरूवाती दौर में एक स्कूल पर हवाई हमला किया था और इस अमानवीय हमले में स्कूली बच्चियों समेत 170 से ज्यादा निर्दोष लोग मारे गए। इस घटना के बाद से ही पूरे ईरान में भारी आक्रोश है और इसके जवाब में ईरान ने ऐसा भीषण पलटवार किया है जिसने अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों को हिला कर रख दिया है। हालांकि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान के टॉप सिक्योरिटी अफसर अली लारीजानी सहित ईरान के कई वरिष्ठ नेताओ की भी मौत होने के बाद भी ईरान का प्रतिरोध जारी है और इसको देखकर अमेरिका के होश उड़े हुए है।

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क्या है अमेरिका और इजरायल का ‘जमीनी’ प्लान?
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने ईरान के खिलाफ सीमित लेकिन बेहद सटीक जमीनी अभियानों (Ground Operations) की रूपरेखा तैयार की है।अमेरिकी सूत्रों के अनुसार यह पूर्ण युद्ध न होकर स्पेशल फोर्सेज और पैदल सेना द्वारा कुछ हफ्तों या महीनों तक चलने वाली कार्रवाई हो सकती है।
मुख्य टारगेट: अमेरिका का फोकस ईरान के मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और तटीय ठिकानों को तबाह करने पर है।


खार्ग द्वीप पर नजर: ईरान के तेल निर्यात के मुख्य केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ को कब्जे में लेने या उसकी नाकेबंदी करने की योजना पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) के आसपास के ठिकानों को खत्म करने की भी तैयारी है।


अमेरिका की मंशा रहा लारक द्वीप और अबू मूसा जैसे रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने और ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंचकर यूरेनियम को सुरक्षित करने (या बड़े हवाई हमले करने) की है।इस बीच वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक, अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्धपोत USS त्रिपोली 3500 मरीन सैनिकों, स्ट्राइकर फाइटर विमानों और भारी साजो-सामान के साथ ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है। ये सैनिक पहले जापान और ताइवान के पास तैनात थे, जिन्हें दो हफ्ते पहले ही यहाँ भेजा गया है। इसके अलावा USS बॉक्सर और दो अन्य युद्धपोतों को भी मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया गया है।


ईरान का पलटवार और युद्ध का बढ़ता खतरा
भले ही अमेरिका 28 फरवरी से शुरू हुए अपने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान भी अब आर-पार के मूड में है। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी जमीनी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और उसके क्षेत्रीय सहयोगी (हूती, हिजबुल्लाह आदि) अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ईरान के कड़े तेवरों और लगातार हो रहे पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी दावों के विपरीत, ईरान झुकने वाला नहीं है।
अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन क्या सीधे तौर पर ईरान की जमीन पर अपनी सेना उतारने का जोखिम उठाता है और ईरान का क्या जबाब होता है।

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