उत्तराखंड में नशीली दवाओं के बढ़ते प्रसार पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान तेज़ कर दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त सचिन कुर्वे ने दवा दुकानों की व्यापक जांच के निर्देश जारी किए हैं, जिसके बाद निरीक्षण दल लगातार अलग-अलग जिलों में कार्रवाई में जुटे हैं। इसी क्रम में कुमाऊं मंडल में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है।
उधम सिंह नगर के पुलभट्टा क्षेत्र में एसके मेडिकल स्टोर पर की गई छापेमारी में प्रतिबंधित दवाओं का बड़ा स्टॉक मिला। स्पेशल ऑपरेशन टास्क फोर्स कुमाऊं और औषधि विभाग की टीम को मिली गोपनीय सूचना के बाद हुई इस कार्रवाई में ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम की 20 हजार से अधिक गोलियां और कई इंजेक्शन बरामद किए गए। ये दवाएं सिर्फ चिकित्सकीय जरूरत पर दी जाती हैं, लेकिन बिना पर्चे पर इनकी बिक्री पूरी तरह गैरकानूनी है।
मौके पर मौजूद दुकान संचालक शकूर खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं किस स्रोत से लाई गईं और किन लोगों तक इनकी आपूर्ति की जानी थी।
इस बार स्वास्थ्य विभाग ने जांच व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तीन अलग-अलग विशेष निरीक्षण दल गठित किए गए हैं, जिन्हें अपने जिले से बाहर तैनात किया गया है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर होने वाली संभावित मिलीभगत को खत्म करती है और कार्रवाई को अधिक निष्पक्ष बनाती है।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम का दुरुपयोग युवाओं में लगातार बढ़ रहा है और यही कारण है कि इन दवाओं की अवैध बिक्री पर सख्त रोक जरूरी मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कुमाऊं में की गई यह कार्रवाई नशे के पूरे नेटवर्क पर प्रभाव डालने वाली है और इससे अवैध व्यापारियों में दहशत का माहौल बना है।
प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। बिना पर्चे के इन दवाओं की बिक्री करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और निरीक्षण अभियान आगे भी चलता रहेगा।
