काशी की मसान होली 2026: मणिकर्णिका घाट पर उड़ी चिता-भस्म, 3 लाख से ज्यादा भक्तों का रेला

वाराणसी (काशी): काशी की गलियों में जहां रंगों और गुलाल की बौछार होती है, वहीं महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आज एक ऐसा नजारा दिखा जिसे…

Masan Holi 2026: Varanasi’s Manikarnika Ghat Erupts in Ash and Devotion

वाराणसी (काशी): काशी की गलियों में जहां रंगों और गुलाल की बौछार होती है, वहीं महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आज एक ऐसा नजारा दिखा जिसे देख दुनिया दंग रह गई। जलती चिताओं के बीच ‘मसान वाली होली’ का भव्य आयोजन हुआ। इस साल इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश से करीब 3 लाख श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचे हुए हैं।

महाश्मशान की राख और महादेव का उल्लास: जानिए क्यों खास है काशी की ‘मसान वाली होली

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चिता-भस्म और डमरू की गूंज
शनिवार दोपहर मणिकर्णिका घाट डमरूओं की थाप और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। नागा साधु और संन्यासी नरमुंडों की माला पहनकर घाट पहुंचे और बाबा मसान नाथ का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद शुरू हुआ चिता की ताजी राख (भस्म) से होली खेलने का सिलसिला। श्मशान की गलियों में उड़ती भस्म और अबीर-गुलाल के बीच भक्त भक्ति में सराबोर नजर आए।


इस बार बदले नियम: DJ पर पाबंदी
भीड़ को देखते हुए इस साल प्रशासन और घाट कमेटी ने कुछ सख्त बदलाव किए हैं:
DJ पर बैन: घाट पर डीजे बजाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
समय की सीमा: मसान होली खेलने का समय सिर्फ 1 घंटे तय किया गया है, जबकि पहले समय की कोई बाध्यता नहीं थी।
पुलिस ने मणिकर्णिका जाने वाली गलियों में रस्सी और बैरिकेडिंग लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया है।


विदेशी पर्यटकों में भी भारी क्रेज
भस्म की इस होली में न केवल साधु-संत बल्कि विदेशी पर्यटक भी झूमते नजर आए। पर्यटकों का कहना है कि जीवन और मृत्यु का ऐसा संगम दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। इससे पहले शुक्रवार को हरिश्चंद्र घाट पर भी इसी तरह की भस्म होली खेली गई थी।


पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं। अगले दिन वह अपने उन भक्तों (भूत-प्रेत, पिशाच और नागा साधु) के साथ होली खेलने श्मशान आते हैं, जो रंग-गुलाल से दूर रहते हैं। काशी में मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि उत्सव माना जाता है।