जानें ‘Where is My Train’ ऐप की पूरी कहानी स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार और गूगल से 280 करोड़ की डील

भारत में ट्रेन से सफर करने वाली यात्रियों के लिए जब भी ट्रेन की लोकेशन जानने की जरूरत होती है तो मोबाइल के जी ऐप…

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भारत में ट्रेन से सफर करने वाली यात्रियों के लिए जब भी ट्रेन की लोकेशन जानने की जरूरत होती है तो मोबाइल के जी ऐप का इस्तेमाल किया जाता है, वह है वेयर इस माय ट्रेन। 10 साल में इस ऐप ने सभी रेल यात्रियों का विश्वास जीत लिया है।

ट्रेनों की सटीक जानकारी ने इस ऐप पर यकीन को बढा दिया है। इस ऐप की शुरूआत भी एक रेलवे स्टेशन पर ही हुई थी।


यह ऐप साल 2015 में शुरू हुई जब अहमद निजाम मोहाइदीन स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। ट्रेन घंटे लेट हुई और प्लेटफार्म पर बैठे-बैठे अहमद परेशान हो गए उसे समय भारत में ओला और उबर जैसी कब सेवाएं अपनी लाइव लोकेशन ट्रैकिंग के कारण काफी लोकप्रिय हो रही थी।

अहमद के मन में विचार आया कि जब कब को लाइव ट्रैक किया जा सकता है तो ट्रेन की सटीक जानकारी के लिए ऐसा कोई सिस्टम क्यों नहीं है। इसी सोच ने ‘Where is My Train’ की नींव रखी।


अहमद ने 2013 में ‘Sigmoid Labs’ नामक एक टेक कंपनी बनाई थी, जो डेटा इंजीनियरिंग और एआई सॉल्यूशंस पर काम करती थी। अपनी टीम के साथ मिलकर उन्होंने ट्रेन ट्रैकिंग ऐप पर काम करना शुरू कर दिया।


यह सफर आसान नहीं था उन्होंने लगभग 1 साल तक इस पर काम किया और 20 से अधिक प्रोटो टाइप भी बनाएं कई बार असफलता के बाद अहमद ने हार नहीं मानी और आखिरकार ‘Where is My Train’ ऐप तैयार करने में सफल रहे।


यह ऐप जब लॉन्च हुआ था तब भारत में मोबाइल डेटा काफी महंगा था और यह हर जगह उपलब्ध भी नहीं था। अहमद के पास बड़े विज्ञापन के लिए फंडिंग नहीं थी लेकिन उन्होंने एक रास्ता निकाला ऐप को सेल टावर डेटा से जोड़ दिया।

इसका मतलब था कि ऐप बिना इंटरनेट या जीपीएस के भी मोबाइल टावरों के जरिए ट्रेन की लोकेशन ट्रैक कर लेगा। यह ऑफलाइन फीचर ही इस ऐप की सबसे खास बात बनी और यह गांव कस्बों तक लोकप्रिय हो गया।


इस एन ओके आइडिया और इसकी सफलता नहीं गूगल का ध्यान अपनी और गूगल को यह टेक्नोलॉजी अपने “नेक्स्ट बिलियन यूजर्स” मिशन के लिए एकदम सटीक लगी। दिसंबर 2018 में, गूगल ने अहमद निजाम की कंपनी सिगमॉइड लैब्स को लगभग 280 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

हालांकि वित्तीय शर्तों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ, लेकिन इस अधिग्रहण ने अहमद निजाम को रातों-रात भारतीय स्टार्टअप जगत का चमकता सितारा बना दिया।


आज ‘Where is My Train’ के 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक डाउनलोड्स हैं। यह ऐप केवल लोकेशन ही नहीं, बल्कि ऑफलाइन शेड्यूल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच लेआउट और पीएनआर स्टेटस जैसी कई सुविधाएं देता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका बैटरी एफिशिएंट होना है और यह इंटरनेट के बिना भी काम करता है अहमद निजाम ने इस छोटे से अप के जरिए करोड़ों भारतीयों के रेल का सफर तनाव मुक्त और आसान बना दिया।


गूगल के साथ करीब चार साल तक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद, अहमद ने दिसंबर 2022 में इस्तीफा दे दिया। साल 2023 में उन्होंने अपना नया स्टार्टअप ‘Regain App’ शुरू किया।

यह ऐप लोगों को मोबाइल और सोशल मीडिया की लत (जैसे रील्स और शॉर्ट्स) से बचाने के लिए बनाया गया है। एक मिलियन से अधिक यूजर्स के साथ, अहमद अब डिजिटल वेलबीइंग और लोगों की प्रोडक्टिविटी सुधारने के नए मिशन पर निकल पड़े हैं।

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