उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम आज बदल जाएगा। केंद्रीय विज्ञान केंद्र के अनुसार उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है।
साथ ही 3400 मीटर और उससे भी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है, जबकि राज्य के अन्य जनपदों में मौसम शुष्क बना रहेगा।
पर्वतीय क्षेत्र में लगातार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और बर्फबारी होने से मैदानी क्षेत्र में तापमान कम दिखाई देगा। मौसम विभाग ने 21 जनवरी तक मौसम इसी तरह रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। एक सप्ताह के दौरान राज्य की पर्वतीय क्षेत्रों की घाटियों में कहीं-कहीं हल्के से मध्य कोहरा भी छाया रहेगा।
हरिद्वार, उधम सिंह नगर की कई स्थानों पर बहुत घना कोहरा छाया रहेगा जिसका ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
हरिद्वार और उधम सिंह नगर में कुछ स्थानों पर शीत लहर चलने से शीत दिवस की स्थिति बने रहने का भी ऑरेंज अलर्ट है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए हरिद्वार जनपद के जिलाधिकारी ने आज स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में छुट्टी घोषित की है।
नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं घना कोहरा छाने का येलो अलर्ट जारी किया गया है, पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं पाला भी पड़ेगा जिससे लोगों को काफी परेशानी होगी। पाला पड़ने के कारण वाहन चालकों को गाड़ी चलाने में दिक्कत होगी और वही फसलों को भी नुकसान होगा।
हरिद्वार और उधम सिंह नगर में शीत दिवस की स्थिति में तापमान कम होने पर सर्द हवाएं ठंड बढ़ा सकती हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं के लिए दिक्कतें भी हो सकती हैं।
वहीं, दूसरी ओर बारिश न होने के कारण चमोली जनपद के नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के जंगल सातवें दिन भी धधकते रहे। वन कर्मियों की दो टीमें अलग-अलग जगह पर आग बुझाने में जुटी रहीं, लेकिन चोटी पर लगी आग को बुझाने में सफलता नहीं मिल पाई है।
9 जनवरी से नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के फूलों की घाटी रेंज और गोविंद घाट रेंज में जंगल जल रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने खड़ी चट्टानों पर लगी आग को बुझाने में असमर्थता जताई थी।
इसके बाद वायु सेना से आग बुझाने के लिए मदद मांगी गई। जिसके बाद वन विभाग ने हवाई सर्वेक्षण किया और आग की खुद ही बुझाने की बात कही। हालांकि, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के जंगलों में लगी आग अब हरे पेड़ों तक पहुंच गई है। आग को निचले स्थान पर फैलने से रोकने के लिए वनकर्मी और श्रमिक लगाए गए हैं।
