कार्मिक एकता मंच(kaarmik ekta manch) ने फारगो नियमावली पर उठाए सवाल.. कहा— कार्मिकों की उपेक्षा नहीं की जाएगी बर्दाश्त

kaarmik ekta manch

kaarmik ekta manch raised questions on Fargo manual

अल्मोड़ा, 10 अगस्त 2020
उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच (kaarmik ekta manch)
की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया. जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई.

मंच (kaarmik ekta manch) के अध्यक्ष रमेश चंद्र पाण्डे की अध्यक्षता में हुए वेबिनार में शासन द्वारा 7 अगस्त को जारी पदोन्नति का परित्याग (फारगो) नियमावली की गहन समीक्षा करते हुए इस नियमावली को लागू करने से पूर्व स्थानान्तरण अधिनियम की विसंगतियों को दूर किए जाने की पुरजोर मांग की गई.

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पदोन्नति के पदस्थापना में सर्वमान्य मानक निर्धारित किए बिना फारगो नियमावली के औचित्य पर सवाल उठाते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि वरिष्ठता एवं सुगम—दुर्गम के आधार पर पदोन्नति में अनिवार्य रूप से काउंसिलिंग की व्यवस्था की जाए.

वक्ताओं ने एक्ट में किये गये सुगम—दुर्गम के विवादित प्रावधान को नासूर की संज्ञा देते हुए कहा कि फारगो नियमावली को लागू करने से पूर्व सरकार इस नासूर को दुरुस्त करे.

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वेबिनार में जवाबदेही के लिए राज्य के समूचे कार्मिक समुदाय से एक मंच पर आने का आह्वान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सामुहिक हितों से जुड़े मुद्दो के समाधान हेतु आज तक शीर्ष स्तर पर महासंघ का स्थापित नहीं हो पाना कार्मिक संघों की सबसे बड़ी कमजोरी है. इस कमजोरी को दूर करते हुए कार्मिकों को अपने वजूद की ताकत का एहसास कराना ही एकता मंच(kaarmik ekta manch) का उद्देश्य है. इसके लिए छेड़े गये जनजागरण अभियान को सफल बनाने हेतु समूचे कार्मिक समुदाय से आगे आने की अपील की गई.

वक्ताओं ने आगाह किया कि शहीदों की शहादत और कार्मिकों की बगावत से बने उत्तराखंड में अब कार्मिकों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी और कार्मिकों के सेवा सम्बन्धी बुनियादी सवालों के प्रति जवाबदेही तय नहीं हुई तो इसके गम्भीर परिणाम होंगे.

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वेबिनार में राज्य गठन के 20 साल बाद भी यूपी कैडर के कार्मिकों को रिलीव नहीं किये जाने पर कड़ा रोष व्यक्त किया गया. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आडिट विभाग में राज्य पुनर्गठन अधिनियम का उल्लंघन करते हुए जिस तरह यूपी कैडर के कार्मिकों के नाम उत्तराखंड की ज्येष्ठता सूची में शामिल किये गये है, उससे उत्तराखंड के कार्मिकों के हकों पर डाका डाला गया है. तय किया गया कि इसका पुरजोर विरोध किया जायेगा.

वेबिनार में संरक्षक पंकज काण्डपाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेन्द्र पाठक, महासचिव दिगम्बर फुलोरिया, मनीष डंगवाल, नरेश भट्ट, कमल झिंगवाण, मानवेन्द्र बर्थवाल, सौरभ चन्द्र, देवेन्द्र विष्ट, आनन्द सिंह, दीपशिखा मेलकानी आदि ने अपने विचार रखें. वेबिनार का संचालन गढ़वाल मंडल के संयोजक सीताराम पोखरियाल ने किया.

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