और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर जम्मू-कश्मीर के सेब और ड्राई फ्रूट से जुड़े किसान और कारोबारी चिंता में हैं। उन्हें डर है कि अगर अमेरिका से सेब और ड्राई फ्रूट बिना कस्टम ड्यूटी के भारत आने लगे, तो यहां के उत्पादों की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।
कश्मीर में बड़ी संख्या में परिवार पीढ़ियों से सेब की खेती पर निर्भर हैं और उनकी रोजी-रोटी इसी से चलती है। किसानों का कहना है कि खेती का खर्च पहले ही लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर बाजार में सस्ता आयात आ गया तो मुनाफा और कम हो जाएगा। खासकर छोटे बाग वाले किसानों को आगे का रास्ता मुश्किल नजर आ रहा है।
बीबीसी हिंदी में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि बड़े शहरों में विदेशी सेब कम कीमत पर बिके तो स्थानीय सेब के दाम तेजी से गिर सकते हैं। कश्मीर का सेब उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इसको लेकर चिंता भी बढ़ी हुई है।
ड्राई फ्रूट कारोबारियों का कहना है कि पहले से ही दूसरे देशों से आयात बढ़ने की वजह से स्थानीय उत्पादों की वैल्यू पर दबाव है। नई ट्रेड डील से यह दबाव और बढ़ सकता है। कई कारोबारी सरकार से ऐसे कदम उठाने की मांग कर रहे हैं जिससे स्थानीय उद्योग को सुरक्षा मिल सके।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि हर सेक्टर पर असर एक जैसा नहीं पड़ेगा। अखरोट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्पादन कम और मांग ज्यादा होने की वजह से उसका असर अलग तरीके से दिख सकता है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर भी चिंता जताई गई है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि व्यापार समझौते में किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है और संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है।भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम ट्रेड समझौते में कुछ खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म किए जाने की खबर सामने आने के बाद किसान संगठनों ने इसका विरोध जताया है। किसान संगठनों के मंच संयुक्त किसान मोर्चा ने इस समझौते को सरकार का गलत कदम बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की और वाणिज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से अलग तस्वीर पेश की जा रही है। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि व्यापार समझौते में संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखा गया है और किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने भी यही बात दोहराते हुए कहा कि सरकार के लिए किसान सर्वोपरि हैं और समझौते में किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं। इस मुद्दे को लेकर जहां किसान संगठनों की चिंता बनी हुई है, वहीं सरकार का दावा है कि व्यापार समझौता संतुलित है और कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
कुल मिलाकर ट्रेड डील को लेकर कश्मीर में अनिश्चितता का माहौल है और किसान-कारोबारी आने वाले समय में बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
