दुनियाभर में इन दिनों इजरायल-ईरान तनाव चरम पर है। इसी बीच एक सबसे बड़ा डर दुनिया को सता रहा है— क्या होगा अगर ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया? यह सिर्फ एक कूटनीतिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि भूगोल, ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा सबसे बड़ा संकट बन सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह संकरा समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है।
क्या है होर्मूज स्ट्रेट और यह इतना संकरा क्यों है? होर्मूज स्ट्रेट फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री जलमार्ग (Chokepoint) है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान हैं। इसके सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है, लेकिन बड़े जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित शिपिंग लेन सिर्फ 3 किलोमीटर ही चौड़ी है। यही वजह है कि इसे ब्लॉक करना या यहाँ जहाजों को रोकना सैन्य रूप से आसान माना जाता है।
वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) की ‘शह-रग’ पूरी दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल (Crude Oil) और दुनिया की कुल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का करीब एक-चौथाई हिस्सा सिर्फ इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंचने का यही मुख्य समुद्री रास्ता है।
अगर शिपिंग रुक जाए तो दुनिया पर क्या होगा असर? अगर यह जलमार्ग कुछ दिनों के लिए भी ब्लॉक हो जाता है, तो इसके परिणाम भयावह होंगे:
• आसमान छुएंगे ईंधन के दाम:
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाएगी, जिससे पेट्रोल, डीजल और गैस (LPG) की कीमतें रातों-रात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी।
• ट्रांसपोर्ट और महंगाई:
ईंधन महंगा होने से दुनिया भर में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
• भारत पर सीधा असर: भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में होर्मूज स्ट्रेट का बंद होना भारत के लिए भारी आर्थिक नुकसान और ईंधन संकट का कारण बन सकता है।

