Handala Hacker Group- ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप के लिए बना मुसीबत

Handala Hacker Group ग्रुप लगातार अमेरिकी सुरक्षा और कॉरपोरेट सिस्टम में सेंधमारी कर रहा है, जिससे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।अमेरिका और ईरान…

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Handala Hacker Group ग्रुप लगातार अमेरिकी सुरक्षा और कॉरपोरेट सिस्टम में सेंधमारी कर रहा है, जिससे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब केवल जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह साइबर स्पेस में भी एक खतरनाक रूप ले चुका है। इस ‘साइबर वॉर’ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर उभरा है ईरानी हैकर ग्रुप ‘हंडाला‘ (Handala Hacker Group)।

FBI डायरेक्टर और DOJ अधिकारी का निजी ईमेल हैक!

Handala Hacker Group ने अब सीधे अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती दी है। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 27 मार्च को इन ईरान-समर्थित Handala Hacker Group ने दावा किया कि उन्होंने फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के डायरेक्टर और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के एक शीर्ष अधिकारी के निजी (Personal) ईमेल अकाउंट्स को हैक कर लिया है। किसी भी देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के प्रमुख के निजी संपर्कों तक हैकर्स की पहुंच होना एक बहुत बड़ी सुरक्षा चूक है। इस घटना ने पूरे अमेरिका में हड़कंप मचा दिया है।

जानें ट्रंप के लिए मुसीबत बने हैकर ग्रुप ‘हंडाला’ (Handala) की पूरी कहानी

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Handala Hacker Group ने 11 मार्च को ‘स्टाइकर’ को बनाया था निशाना, शेयरों में आई 2.5% की गिरावट

इससे पहले Handala Hacker Group ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी चोट की थी। Handala Hacker Group ने 11 मार्च को अमेरिका की जानी-मानी मेडिकल तकनीक कंपनी ‘स्टाइकर’ (Stryker) के सिस्टम को हैक कर लिया था। इस बड़े साइबर हमले ने अमेरिकी कॉरपोरेट जगत की साइबर सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी। इस हैकिंग का सीधा असर कंपनी के कारोबार पर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, साइबर हमले के बाद शेयर बाजार में स्टाइकर के शेयरों में 2.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई।

ट्रंप प्रशासन के लिए क्यों है यह बड़ी मुसीबत?

  • खुफिया और निजी जानकारी का खतरा: FBI चीफ और DOJ अधिकारी के निजी ईमेल तक पहुंच का मतलब है कि अमेरिका की कई अति-संवेदनशील, खुफिया और ब्लैकमेल करने योग्य जानकारियां ईरान के हाथ लग सकती हैं।
  • अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार: स्टाइकर के शेयरों में आई गिरावट इस बात का प्रमाण है कि ईरानी हैकर्स अमेरिकी शेयर बाजार और निवेशकों के भरोसे को डगमगा सकते हैं।
  • साइबर सुरक्षा पर सवाल: लगातार हो रहे इन हमलों से ट्रंप प्रशासन की साइबर सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
  • कॉरपोरेट जगत में दहशत: स्टाइकर हैकिंग के बाद से अमेरिकी कंपनियों में खौफ का माहौल है कि अगला नंबर उनका हो सकता है। यह व्यापार को बुरी तरह अस्थिर कर सकता है।