2026 में रखें अपना CV तैयार, मिल रही है करोडो नौकरियां, इन तीन सेक्टर में होगी भर्तिया, महिलाओं के लिए है खास मौका

अगर आप नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं या फिर करियर में बदलाव चाहते हैं तो 2026 आपके लिए खुशखबरी लेकर आया है। बताया…

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अगर आप नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं या फिर करियर में बदलाव चाहते हैं तो 2026 आपके लिए खुशखबरी लेकर आया है। बताया जा रहा है कि 2025 के मुकाबले 2026 में 20% ज्यादा नौकरियां मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।


बताया जा रहा है कि भारतीय कंपनी इस साल एक करोड़ से 1.2 करोड़ के बीच नई भर्तियां करेंगी। साल 2025 में यह आंकड़ा 80 लाख से 1 करोड़ के बीच था।

इन तीन सेक्टर्स में रहेगी सबसे ज्यादा डिमांड:

टेलीकॉम, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा (1.5 लाख करोड़ डॉलर) संभालते हैं। इन सेक्टर्स में फिलहाल 4.2 करोड़ लोग काम कर रहे हैं।


अनुमान है कि FY26 तक इनमें 1.2 करोड़ अतिरिक्त पद जुड़ेंगे। खास बात यह है कि कुल नई नौकरियों में से 17% स्पेशलाइज्ड स्किल्स के लिए होंगी। टेलीकॉम और हेल्थ केयर सेक्टर अब इंडस्ट्री 4.0 की ओर बढ़ रहे हैं

इसका मतलब यह है कि कंपनियों में स्मार्ट प्रोडक्ट्स डाटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ज्यादा काम हो रहे हैं अब रोल पारंपरिक न रहकर डिजिटल और टेक ओरिएंटेड हो गए हैं।


देश की बड़ी कंपनियों ने अपने हायरिंग प्लान साझा किए हैं जिनमें विविधता (Diversity) और कैंपस प्लेसमेंट पर मुख्य फोकस है। कंपनी इस वित्त वर्ष (जून 2026 तक) में 14,000 से 15,000 लोगों को नौकरी देगी। इसमें से करीब 2,000 लोग सीधे कॉलेजों (कैंपस) से लिए जाएंगे।

यहां हायरिंग का मुख्य फोकस भविष्य की तकनीक पर है जैसे— बैटरी टेक्नोलॉजी, हाइड्रोजन फ्यूल और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स।

ये कंपनियां महिलाओं, LGBTIQA+ और दिव्यांगों (Persons with Disabilities) का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। गोदरेज का लक्ष्य इन वर्गों की हिस्सेदारी 33% तक ले जाना है। फाइनेंशियल सेक्टर की यह दिग्गज कंपनी टेक, डेटा साइंस और AI के क्षेत्र में नए विशेषज्ञों को जोड़ेगी।


क्यों बढ़ रही हैं इतनी नौकरियां?


डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: हर क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है।


GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स): विदेशी कंपनियां भारत में अपने केंद्र खोल रही हैं।


कंज्यूमर डिमांड: छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में सामान और सेवाओं की मांग बढ़ने से रोजगार के मौके बढ़े हैं।


हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार और प्राइवेट सेक्टर की ओर से भारी निवेश।

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