नई दिल्ली/देहरादून: दुनिया भर की सड़कों पर दौड़ रहे इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) ने अब वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था की चूलें हिलाना शुरू कर दिया है। साल 2025 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि परिवहन क्षेत्र में बिजली के बढ़ते इस्तेमाल से तेल की निर्भरता में ऐतिहासिक गिरावट आई है।
ईरान के निर्यात के बराबर बचत
ग्लोबल एनर्जी थिंक टैंक Ember की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों ने दुनिया भर में रोजाना 1.7 मिलियन बैरल तेल की खपत को कम कर दिया है। यह मात्रा ईरान के कुल तेल निर्यात (लगभग 2.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन) के 70% के बराबर है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि EVs अब केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि देशों की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं।
एशियाई देशों के लिए बड़ी राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की 79% आबादी उन देशों में रहती है जो तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतों में मात्र 10 डॉलर की बढ़ोतरी से वैश्विक आयात बिल 160 अरब डॉलर बढ़ जाता है। भारत, चीन और जापान जैसे देशों के लिए यह जोखिम और भी बड़ा है, क्योंकि उनका 40% तेल Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) जैसे संवेदनशील मार्ग से आता है।
भारत और चीन का प्रदर्शन
- चीन: 2025 में चीन ने एक नया कीर्तिमान रचा, जहाँ EVs की बिक्री की हिस्सेदारी 50% के पार निकल गई। इसके चलते चीन सालाना 28 अरब डॉलर के तेल आयात की बचत कर रहा है।
- भारत: भारत में अभी EV की हिस्सेदारी करीब 4% है, लेकिन रफ़्तार तेज़ी से बढ़ रही है। भारत ने मौजूदा बदलाव से करीब 0.6 अरब डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) की बचत की है।
600 अरब डॉलर की सालाना बचत संभव
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पूरी दुनिया में परिवहन को इलेक्ट्रिक कर दिया जाए, तो हर साल तेल आयात में 600 अरब डॉलर बचाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2029 तक वैश्विक तेल की खपत अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर पहुँचकर गिरना शुरू हो जाएगी।
