सुनने-बोलने की कमी के बावजूद पैरा शूटर भक्ति शर्मा का सटीक निशाना, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा रहीं देश की प्रतिष्ठा

दिल्ली की पैरा शूटर भक्ति शर्मा ने अपनी कमियों को कभी भी अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। जन्म से सुन और बोल न…

दिल्ली की पैरा शूटर भक्ति शर्मा ने अपनी कमियों को कभी भी अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। जन्म से सुन और बोल न पाने की समस्या के बावजूद भक्ति ने मेहनत और धैर्य से खुद को इतना मजबूत बनाया कि आज वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग मुकाबलों में भारत का नाम चमका रही हैं। खासकर दस मीटर एयर पिस्टल में उनका निशाना बेहद सटीक माना जाता है। पिछले साल दुबई में हुई पैरा शूटिंग विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीतकर देश की इज्जत बढ़ाई थी।

भक्ति की शुरुआत घर से ही हुई। उनके पिता योगेंद्र शर्मा पुलिस परिवार से हैं, जहां बचपन से ही शस्त्र पूजा की परंपरा रही है। इसी माहौल में भक्ति ने पहली बार पिस्तौल को हाथ में पकड़ने में रुचि दिखाई। पिता ने जब उन्हें निशाना लगवाया, तभी उन्हें समझ आ गया था कि भक्ति आगे चलकर कुछ अलग कर सकती है।

कोरोना काल में पंजाबी क्लब में आयोजित पहली प्रतियोगिता में भक्ति ने गोल्ड जीतकर इस विश्वास को और पक्का कर दिया।
इसके बाद भक्ति का सफर तेज़ी से आगे बढ़ा। दिल्ली की छोटी प्रतियोगिताओं से होते हुए वह नेशनल मंच पर पहुंचीं और फिर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन किया। कोरिया में उनकी पहली विदेशी प्रतियोगिता ने उन्हें गोल्ड दिलाया। खेलो इंडिया पैरा चैंपियनशिप समेत कई बड़े टूर्नामेंट्स में लगातार जीत ने उन्हें देश की प्रमुख पैरा शूटरों में शामिल कर दिया है।

आज वह कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में नियमित अभ्यास करती हैं, जहां उनकी बड़ी बहन श्रद्धा हर कदम पर उनका साथ निभाती हैं।
हालांकि भक्ति की राह आसान नहीं रही। उनके पिता बताते हैं कि शूटिंग बहुत महंगा खेल है और पैरा खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं अभी भी कम हैं। हथियार और गोलियां विदेश से मंगानी पड़ती हैं या किराए पर लेनी पड़ती हैं।

सरकार से मिली आर्थिक सहायता सीमित है, जबकि इस स्तर पर तैयारी के लिए काफी मदद की जरूरत होती है। इसके बावजूद भक्ति को उनके कोच जेपी नौटियाल और परिवार ने हमेशा मजबूत बनाया।
भक्ति की मां दीपाली पराशर बताती हैं कि तीन साल की उम्र में तेज बुखार के बाद उन्हें सुनने और बोलने में दिक्कत हो गई थी। इलाज, थेरेपी और स्पेशल स्कूल की पढ़ाई ने भक्ति को धीरे-धीरे आगे बढ़ने में मदद की। अब वह एनआईओएस से पढ़ाई जारी रखे हुए हैं और आने वाली खेलो इंडिया पैरा चैंपियनशिप के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उनकी कोशिश है कि एक बार फिर वे देश का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर फहराएं।

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