मुख्यमंत्री का आपदाग्रस्त (Distressed) क्षेत्रों में न आना दुर्भाग्यपूर्ण: धामी

Distressed

Chief Minister misfortune not to come in Distressed areas

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पिथौरागढ़ सहयोगी, 06 अगस्त 2020
विधायक हरीश सिंह धामी ने कहा कि धारचूला विधानसभा क्षेत्र पिछले 2 सप्ताह से ज्यादा समय से भीषण आपदा (Disaster
) की मार झेल रहा है।

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इसके चलते तल्ला जौहार से लेकर मुनस्यारी, धारचूला और व्यास, चैदास व दारमा घाटियों के हालात बहुत खराब हैं। ऐसे में विस्थापन के लिए सूचीबद्ध गांवों को जल्द विस्थापित करने, पीड़ित परिवारों के सदस्यों को आर्थिक मदद देने और क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुए मार्गों, सड़कों-पुल तथा पेयजल व बिजली योजनाओं का शीघ्र पुनर्निर्माण करने की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री अब तक क्षेत्र (Distressed में नहीं आए हैं।

विधायक धामी ने गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता में कहा कि इस आपदा से अनेक गांवों में मानवीय क्षति हुई है और लोगों की जमीन, जानवर और रोजी-रोटी के संसाधन समाप्त हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागीय योजनाएं, विद्युत लाइन और अन्य योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं। मदकोट-मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग अब तक नहीं खुल सका है। गांवों के आंतरिक मार्ग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में अपने गांवों से जरूरी कार्यों और रोजमर्रा की जरूरत के लिए आने-जाने के दौरान लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

विधायक धामी ने मुख्यमंत्री से सूचीबद्ध गांवों को विस्थापित करने, आपदा पैकेज की घोषणा करने, प्रभावितों को मुआवजा और जिस परिवार में घर की आजीविका चलाने वाले सदस्य की मौत हुई है, उस परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग की है।

विधायक धामी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और राज्यपाल को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भी भेजा। इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, वरिष्ठ नेता प्रदीप पाल आदि मौजूद थे।

विधायक ने दी अनिश्चितकालीन उपवास की चेतावनी

विधायक हरीश धामी ने धारचूला विस क्षेत्र में आपदा के बाद बंद पड़े राजमार्गों, मोटर और आंतरिक मार्गों जल्द खोले जाने की मांग जिलाधिकारी से भी की है।

ऐसा न होने पर क्षेत्रवासियों के साथ कलक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन उपवास रखने की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि पेयजल, बिजली व अन्य योजनाओं के ध्वस्त होने के साथ ही वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या बंद मोटर व संपर्क मार्गों की है, जिन्हें संबंधित विभाग अब तक नहीं खोल पाये हैं।

प्रभावित गांवों (Distressed) में किसी के बीमार होने पर जान जोखिम में डालकर ग्रामीण उसे डोली के सहारे या पीठ में लादकर अस्पताल तक लाने को विवश हैं। इन हालातों में क्षेत्रवासियों में प्रशासन व विभागीय अधिकारियों के प्रति रोष व्याप्त है।

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