आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खा पान का असर शरीर के साथ-साथ दांतों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बच्चों से लेकर बड़ों तक दांतों में कीड़ा लगने यानी कैविटी की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। शुरुआत में लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यही परेशानी आगे चलकर तेज दर्द, संवेदनशीलता और दांतों को नुकसान पहुंचाने की वजह बन सकती है।
दंत विशेषज्ञ डॉ. फुरकान अंसारी के मुताबिक ज्यादातर मामलों में रात के समय मीठा खाने के बाद बिना कुल्ला किए सो जाना कैविटी बनने का प्रमुख कारण होता है। जब मुंह में मीठे पदार्थ लंबे समय तक रह जाते हैं तो बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं और धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को ठंडा या गर्म लगना शुरू हो जाए या दांतों में अचानक दर्द महसूस होने लगे तो यह कैविटी की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।
दांतों में कीड़ा लगने के पीछे सबसे बड़ा कारण मुंह की सही सफाई न करना माना जाता है। कई लोग रात में ब्रश किए बिना ही सो जाते हैं, वहीं ज्यादा चॉकलेट, टॉफी और मीठी चीजों का सेवन भी इस समस्या को बढ़ाता है। भोजन करने के बाद कुल्ला न करने की आदत और दिनभर बार-बार स्नैक्स खाते रहने से दांतों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है और धीरे-धीरे दांतों की सतह कमजोर होने लगती है।
अगर कैविटी शुरुआती अवस्था में है और दर्द बहुत ज्यादा नहीं है तो कुछ घरेलू उपाय अस्थायी राहत दे सकते हैं। इसके लिए दो लौंग को पीसकर उसमें एक चम्मच सरसों का तेल और एक चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है।
इस पेस्ट को कीड़े वाले दांत या कैविटी वाली जगह पर लगभग पांच मिनट तक लगाने से बैक्टीरिया की सक्रियता कम करने में मदद मिल सकती है। लौंग और फिटकरी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण सूजन को कम करने और दर्द से राहत देने में सहायक माने जाते हैं।
इसके अलावा दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए आधा चम्मच सरसों के तेल में एक चुटकी नमक मिलाकर उंगली से हल्के हाथों से मसाज करना भी फायदेमंद माना जाता है। दिन में एक या दो बार ऐसा करने से दांतों पर जमी गंदगी साफ होने लगती है और मुंह की बदबू से भी राहत मिल सकती है।
दांतों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश करना बेहद जरूरी माना जाता है। मीठी या चिपचिपी चीजें खाने के बाद साफ पानी से कुल्ला करना चाहिए ताकि भोजन के कण दांतों में न फंसे रहें। दांतों के बीच फंसे भोजन को निकालने के लिए फ्लॉस का इस्तेमाल करना भी लाभकारी होता है। इसके साथ ही हर छह महीने में एक बार दंत चिकित्सक से जांच कराना दांतों की समस्याओं को समय रहते पहचानने और उनका सही इलाज कराने में मदद करता है।
