दिल्ली में तेज़ डिलीवरी की दौड़ पर उठ रही चिंताओं ने सरकार को अब सीधे हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया है। दस मिनट में सामान पहुंचाने जैसे आकर्षक वादों ने कई डिलीवरी एजेंटों को दुर्घटनाओं और नुकसान की परिस्थितियों में धकेल दिया है। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों को देखते हुए केंद्र ने ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसे सभी बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को तुरंत इन तरह के विज्ञापन हटाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार की ओर से की गई बैठक में इन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बात को गंभीरता से लेते हुए सहमति जताई। ब्लिंकिट ने तो सरकार को आश्वस्त किया है कि वह अपनी ऐप और प्लेटफॉर्म से तेज़ डिलीवरी वाले विज्ञापनों को पूरी तरह हटा देगा।
उम्मीद की जा रही है कि अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम बढ़ाएंगी। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने क्विक कॉमर्स सेक्टर से जुड़े अधिकारियों से डिलीवरी समय सीमा हटाने पर विस्तृत चर्चा की थी।
यह मुद्दा संसद में भी उठ चुका है, जहां आप सांसद राघव चड्डा ने तेज़ डिलीवरी के पीछे छिपी मानवीय कीमत को समझने की बात कही थी। इसी सिलसिले में उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह खुद डिलीवरी एजेंट की तरह काम करते नजर आए। उन्होंने लिखा कि वह नीति की बहस से इतर, असली हालात को अपनी आंखों से देखना चाहते थे।
कुछ दिन पहले ही गिग वर्कर्स की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई थी। इसके बाद सरकार और कंपनियों के बीच सहमति बनी कि अब गिग वर्कर्स के लिए एक केंद्रीकृत रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा।
इस व्यवस्था में आधार अनिवार्य होगा और पंजीकरण की न्यूनतम आयु 16 वर्ष तय की गई है।
डेटा मिलान के बाद प्रत्येक वर्कर को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जारी किया जाएगा।
पंजीकरण पूरा होने पर वर्कर को डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जिसमें फोटो और जानकारी दर्ज होगी।
मोबाइल नंबर, पता या कौशल में बदलाव होने पर पोर्टल पर जानकारी अपडेट करना आवश्यक होगा, ताकि किसी भी लाभ में रुकावट न आए।
