देहरादून: जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही उत्तराखंड में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अब तय कार्यक्रम के मुताबिक पूरे राज्य में अलग-अलग चरणों में जनगणना का काम होगा। इसके साथ ही कुछ अहम नियम अपने आप लागू हो गए हैं, जिनका असर सीधे प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जनगणना पूरी होने तक राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को स्थिर मान लिया गया है। यानी इस दौरान किसी भी जिले, तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, पंचायत या वार्ड की सीमा में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। आमतौर पर इसके लिए अलग से आदेश जारी नहीं होता, बल्कि अधिसूचना लागू होते ही यह व्यवस्था स्वतः लागू हो जाती है।
केंद्र सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अब राज्य में चरणबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। प्रशासन का फोकस इस बार सटीक और व्यवस्थित डेटा जुटाने पर रहेगा, ताकि आगे की योजनाएं सही आधार पर बन सकें।
सबसे पहले शुरू होगा प्रशिक्षण
16 फरवरी से जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कई स्तरों पर होगा।ये सभी प्रशिक्षित कर्मचारी आगे अपने-अपने क्षेत्रों में बाकी स्टाफ को भी ट्रेनिंग देंगे, ताकि पूरे राज्य में एक समान तरीके से काम हो सके।
- पहले चरण में 23 कर्मचारी मास्टर ट्रेनर बनेंगे।
- इसके बाद 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनिंग दी जाएगी।
- करीब 4000 कर्मचारियों को सुपरवाइजर बनाया जाएगा, जो जमीनी स्तर पर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
तीन चरणों में पूरी होगी जनगणना
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां जनगणना का काम तीन अलग-अलग चरणों में किया जाएगा, क्योंकि कई ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के कारण सामान्य समय में पहुंचना मुश्किल होता है।
और पढ़ें
UOU Admit Card 2026: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने जारी किया प्रवेश पत्र
महिला चिल्लाती रही ‘मैं प्रेग्नेंट हूं’… जानिए पूरा मामला
सुरेंद्र कोली- अल्मोड़ा का वो नौजवान जिसे देश ने समझ लिया था राक्षस ,अब सुप्रीम कोर्ट से हुआ बरी
पहला चरण:
25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और परिवारों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
दूसरा चरण:
11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक उन ऊंचाई वाले और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में काम होगा, जहां सामान्य मौसम में पहुंचना मुश्किल रहता है।
तीसरा और अंतिम चरण:
9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक बचा हुआ काम पूरा किया जाएगा और पूरे राज्य का अंतिम डेटा तैयार किया जाएगा।
सीमाएं क्यों की जाती हैं स्थिर
जनगणना के दौरान अगर नए जिले, नगर निकाय या वार्ड बनाए जाते हैं तो आंकड़ों की सटीकता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से इस अवधि में राज्य सरकार भी किसी नए नगर निगम, नगर पंचायत या प्रशासनिक बदलाव का फैसला नहीं ले सकती।
दरअसल जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती नहीं होती, बल्कि यही आंकड़े आगे चलकर विकास योजनाओं, संसाधनों के बंटवारे और नीतिगत फैसलों की नींव बनते हैं। इसलिए इसे पूरी गंभीरता और तय समय के साथ पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
