कार्बाइड गन बनी खतरा, गाजीपुर व पूर्वांचल में करीब 65 बच्चों की आंखों की गई रोशनी

एक रिपोर्ट में सामने आया है कि गाजीपुर और पूर्वांचल के कई जिलों में कार्बाइड गन बच्चों की आंखों के लिए बड़ा खतरा बन गई…

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एक रिपोर्ट में सामने आया है कि गाजीपुर और पूर्वांचल के कई जिलों में कार्बाइड गन बच्चों की आंखों के लिए बड़ा खतरा बन गई है। यहां करीब 65 बच्चों की आंखों की रोशनी इस खतरनाक गन की वजह से चली गई। इनमें 30 से ज्यादा बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं, जबकि 18 से 23 वर्ष के करीब 10 युवाओं की भी आंखें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। डॉक्टरों का साफ कहना है कि अब ऐसे मामलों में सर्जरी ही एकमात्र उम्मीद बची है।


डॉक्टरों ने बताया कि मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, जमानिया और खानपुर जैसे कई इलाकों से बच्चे इलाज के लिए पहुंचे थे। कार्बाइड गन का असर कितना गंभीर है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि कई बच्चों की आंखों की स्थिति बेहद नाजुक है और उन्हें तुरंत सर्जरी की जरूरत है।


गाजीपुर में भी दिवाली वाले दिन मेडिकल कॉलेज में 10 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए पहुंचे थे। नेत्र सर्जन डॉक्टर स्नेहलता सिंह ने खुद उनका उपचार किया। उन्होंने बताया कि दिवाली की पूजा शुरू ही होने वाली थी, तभी इमरजेंसी से लगातार फोन आते रहे और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचना पड़ा। करीब 10 बच्चे वहां लाए गए, जिनमें तीन से चार की आंखें बेहद गंभीर हालत में थीं। उनकी स्थिति देखते हुए उन्हें तुरंत हायर सेंटर भेजा गया।


नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर स्नेहलता सिंह का कहना है कि दिवाली और छठ पूजा के दौरान ऐसे करीब सात–आठ मरीज हल्की चोट के साथ आए, जिनके हाथ या चेहरे पर जलन थी। लेकिन तीन से चार मामले बहुत गंभीर थे। इनमें कुछ बच्चों की कॉर्निया फट चुकी थी और कुछ को इतनी गहरी चोट थी कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।


कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब देखकर दो पाइपों की मदद से खुद कार्बाइड गन बनाई थी। उसमें कार्बाइड की गोली डालकर पानी मिलाया और फिर लाइटर से आग लगाई। शुरुआत में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन कई बार ऐसा हुआ कि धमाका आगे की जगह उल्टा हो गया और पूरा झटका चेहरे पर आ गया। इसी से उनकी आंखों को भारी चोट पहुंची।


डॉक्टरों ने बताया कि गंभीर मरीजों की आंखों में जो चोटें आईं, वे थर्मोकेमिकल इंजरी थीं, यानी गर्मी और केमिकल दोनों ने मिलकर आंख को नुकसान पहुंचाया। कई बच्चों की कॉर्निया जल गई, कुछ की फट गई और कई में खून जम गया। ऐसी चोटें आगे चलकर स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती हैं और यही वजह है कि डॉक्टर इस गन को बेहद खतरनाक मानते हैं।

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