अल्मोड़ा में जुटे देशभर के साइंस सेंटर प्रमुख, नई टेक्नोलॉजी और युवाओं को जोड़ने का बना बड़ा प्लान

अल्मोड़ा के मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में तीन दिनों तक देशभर से आए विज्ञान संग्रहालयों और विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों का बड़ा जमावड़ा लगा। इस राष्ट्रीय…

Big Decisions from Almora National Meet Sets New Vision for Science Centres, Focus on Youth and Innovation

अल्मोड़ा के मानसखण्ड विज्ञान केंद्र में तीन दिनों तक देशभर से आए विज्ञान संग्रहालयों और विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों का बड़ा जमावड़ा लगा। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में विज्ञान को आम लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाने को लेकर गंभीर मंथन किया गया।


उत्तराखंड में पहली बार इस तरह का आयोजन होने से राज्य को भी राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली।


बैठक में के दौरान इस बात पर खास जोर दिया गया कि अब विज्ञान केंद्र सिर्फ देखने-समझने की जगह न रहकर ऐसे इंटरैक्टिव मंच बनें, जहां लोग खुद प्रयोग करके सीख सकें। एक्सपेरिमेंटल पार्क, साइंस थिएटर, STEM लैब, 3-डी जैवविविधता प्रदर्शन, वर्चुअल रियलिटी, डाटा कोडिंग और डिजिटल टूल्स जैसी नई तकनीकों को ज्यादा से ज्यादा शामिल करने पर बात हुई। खेल-खेल में विज्ञान सिखाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई ताकि बच्चों और युवाओं की दिलचस्पी बढ़े।


सम्मेलन में यह बात भी सामने आई कि शोध और प्रयोग सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की असली जरूरतों से जुड़ें। वक्ताओं ने कहा कि अगर विज्ञान सीधे लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का हल देने लगे तो उसका असर ज्यादा दिखाई देगा। युवाओं को विज्ञान से जुड़े स्टार्टअप और स्वरोजगार की तरफ बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।


इस तीन दिनी कार्यक्रम में कई अहम फैसले भी लिए गए। देशभर के विज्ञान केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक साझा नेटवर्क बनाने की योजना बनी। विज्ञान संचार को और प्रभावी बनाने के लिए 3-डी फिल्मों की राष्ट्रीय लाइब्रेरी तैयार करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही विज्ञान संप्रेषकों के लिए ‘अल्मोड़ा घोषणा-पत्र’ जारी करने की घोषणा की गई, जिसे इस क्षेत्र में नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
समापन सत्र में आयोजन से जुड़े सभी संस्थानों और सहयोगियों का आभार जताया गया। सम्मेलन के अंत में यह भी तय हुआ कि अगला, यानी 22वां राष्ट्रीय सम्मेलन अगले साल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित किया जाएगा।


आयोजकों के अनुसार आयोजन सिर्फ अल्मोड़ा या उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे देश में विज्ञान को नई सोच, नई तकनीक और समाज से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभरा है।

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