राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने फास्टैग वार्षिक पास को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। हाल के दिनों में कुछ शातिर लोग फर्जी वेबसाइट बनाकर नकली फास्टैग एनुअल पास बेच रहे हैं। ऑनलाइन ठगी का तरीका इतना साधारण दिखता है कि थोड़ा सी लापरवाही होते ही लोग पैसे और अपनी निजी जानकारी दोनों की गंवा देते है।
एनएचआई ने साफ कर दिया कि असली फास्ट टैग वार्षिक पास केवल उसके अधिकृत राजमार्ग यात्रा एप के माध्यम से ही मिलता है। यह एप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर उपलब्ध है। इसके अलावा किसी भी वेबसाइट, लिंक या एजेंसी को इस पास को बेचने की अनुमति नहीं है। फर्जी प्लेटफार्म लोगों को लिंक भेजकर उनसे निजी जानकारी भरवाते हैं, जिससे उनके डेटा के गलत इस्तेमाल और ठगी का खतरा बढ़ जाता है।
फास्टैग एनुअल पास प्राइवेट कार, जीप और वैन जैसे नॉन कमर्शियल वाहनों के लिए जारी किया गया है। इस पास के माध्यम से 3000 रुपए के रिचार्ज पर एक साल में 200 नेशनल हाईवे टोल प्लाजा को पर ही मान्य है। फास्टैग आरएफआईडी तकनीक पर चलने वाली व्यवस्था है, जिसके माध्यम से वाहन के प्रीपेड खाते से टोल शुल्क अपने आप कट जाता बज और यात्रा बिना रोक टोक जारी रहती है।
