देहरादून। चैत्र नवरात्रि इस बार 19 मार्च से शुरू होने जा रही है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और इस दौरान कुट्टू के आटे से बने व्यंजनों का सेवन करते हैं। इसी कारण इन दिनों बाजार में कुट्टू के आटे की मांग तेजी से बढ़ जाती है। बढ़ती मांग के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है, जिसे देखते हुए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पहले ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। विभाग ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि बाजार में केवल सील पैक कुट्टू के आटे की ही बिक्री की जाए और पैकेट पर एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा।
दरअसल पिछले साल चैत्र नवरात्र के दौरान मिलावटी और खराब कुट्टू का आटा खाने से देहरादून और हरिद्वार जिले में कई लोग बीमार पड़ गए थे। उस घटना के बाद खाद्य संरक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि कुट्टू के आटे की आपूर्ति सहारनपुर से की गई थी। उस समय फूड इंस्पेक्टर्स ने देहरादून और हरिद्वार के कई दुकानों से सैंपल भी लिए थे और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
पिछले साल की घटना को ध्यान में रखते हुए विभाग इस बार पहले से ही अलर्ट मोड में है। जारी की गई एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि खुले में कुट्टू का आटा बेचने की अनुमति नहीं होगी। दुकानों पर केवल पैकेट बंद आटा ही बेचा जाएगा और उस पर निर्माण तिथि के साथ एक्सपायरी डेट का उल्लेख जरूरी होगा।
इसी के साथ खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सभी फूड इंस्पेक्टर्स को लगातार बाजारों में निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं। विभागीय अधिकारियों ने उद्योग व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ बैठक कर उन्हें इन निर्देशों की जानकारी दी और गुणवत्ता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि पिछले वर्ष कुट्टू का आटा खाने से देहरादून और हरिद्वार में बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार नवरात्र से पहले ही अधिकारियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाजार में मिलावटी या खराब कुट्टू का आटा बिक्री के लिए न पहुंच सके। साथ ही व्यापारियों को भी विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।
