हाई कोर्ट में वर्ष 2012 से 2017 के बीच बद्रीनाथ समिति की ओर से फंड के दुरुपयोग करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर अब सुनवाई की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्याय मूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार व बद्रीनाथ केदारनाथ समिति को 3 सप्ताह के अंदर इस बारे में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद होगी। ऋषिकेश निवासी अमित शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी और कहा था कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2017 के बीच बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए जो फंड जारी किया गया था। उस फंड का दुरुपयोग किया गया है।
फंड का उपयोग ऐसे में मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए किया गया, जो बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन नहीं थे। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि समिति में तमाम कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियां भी की गई, जिसकी अनुमति नहीं ली गई। अपने खास लोगों को मंदिर की सेवा में रख लिया गया, जो कि नियमावली के विरुद्ध है।
इस याचिका में कोर्ट से मामले की जांच की प्रार्थना भी की गई थी। याचिका कर्ता की ओर से 2023 में तत्कालीन गढ़वाल कमिश्नर में अपनी जांच संलग्न की थी। बताया गया की पौड़ी में प्राचीन बिनसर मंदिर का पुनर्निर्माण बिना निविदा के किया गया जबकि यह मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं था।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पहले भी कोर्ट ने राज्य सरकार व मंदिर समिति से जवाब के लिए कहा था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया जबकि राज्य सरकार व मंदिर समिति की और से जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया था।
पक्षो की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार का मंदिर समिति से 3 सप्ताह के अंदर जवाब देने के आदेश दिए हैं।