देहरादून: अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर हुई महापंचायत में हुजूम उमड़ पड़ा। महापंचायत में पूर्व सीएम हरीश रावत,विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठनों और आम नागरिकों ने शिरकत की।
अंकिता के माता पिता भी महापंचायत में मौजूद रहे।
अंकिता की मां सोनी देवी जितनी देर मंच पर रही, उनके आंसू नहीं थमे। उन्होंने मंच से कुछ बोलने से भी मना किया। हालांकि वीरेन्द्र सिंह ने अपनी संक्षिप्त बात रखी और कहा कि मेरी बेटी नहीं झुकी तो मैं कैसे झुक सकता हूं।
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर हुई महापंचायत में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि मुख्यमंत्री को पद से हटाकर उन्हें भी सीबीआई जांच के दायरे में लिया जाए। एक अन्य प्रस्ताव पारित करके कहा गया कि इस मामले की सीबीआई जांच अंकिता के माता पिता के पत्र अनुसार हो, किसी नए व्यक्ति जिसे पीड़ित परिवार नहीं जानते उस एफआईआर को रद्द कर देना चाहिए।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से परेड ग्राउंड में बुलाई गई महापंचायत में करीब 40 संगठनों ने हिस्सा लिया।
इंडिया गठबंधन की घटक राजनीतिक पार्टियों ने इस महापंचायत को समर्थन दिया था।
महापंचायत की अध्यक्षता अंकिता की मां सोनी देवी और पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने की। जस्टिस फॉर अंकिता मंच श्रीनगर की रेशमा पंवार, महिला किसान अधिकार मंच ऊधम सिंह नगर की हीरा जंगपांगी, उत्तराखंड महिला मंच नैनीताल की बसंती पाठक, राज्य आंदोलनकारी ऊषा भट्ट और भारत ज्ञान विज्ञान समिति की उमा भट्ट ने पंच की भूमिका निभाई।
पांचों पंचों ने महापंचायत में पांच अलग-अलग प्रस्ताव पेश किये। सभी प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किये गये। इन प्रस्तावों में अंकिता के माता-पिता के मुख्यमंत्री को दिये गये पत्र के आधार पर सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में करवाने की मांग की गई।
एक अन्य प्रस्ताव में कहा गया कि 15 दिन के भीतर पीड़ित पक्ष की शिकायत पर जांच शुरू करवाई जाए। ऐसा न होने में पूरे राज्य में आंदोलन तेज करने की बात कही गई।
एक अन्य प्रस्ताव में जिन लोगों के नाम वीआईपी के तौर पर जनता के बीच आए हैं उन्हें उनके पदों से हटाकर जांच के दायरे में लाने की बात कही गई। महांपचायत के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक पत्र भी भेजा गया। पत्र तुषार रावत ने पढ़कर सुनाया।
अंकिता के पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि लोगों में एक भ्रम फैलाया गया था कि अंकिता के मुख्यमंत्री से मिले थे और वे बिक गये हैं। उन्होंने कहा कि हमने मुख्यमंत्री से मिलकर सीबीआई जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट के जज से करने की मांग का पत्र दिया था।
पर ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के एफआईआर पर कार्रवाई हो रही है उस व्यक्ति को वह जानते तक नहीं। एफआईआर दर्ज करवाने से पहले और उसके बाद उन्होंने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार द्वारा पोषित व्यक्ति की एफआईआर पर करवाई गई जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। ऐसे में हमें शक है कि सीबीआई की जांच में भी वीआईपी को बचाया जाएगा।
सीपीआई माले के इंद्रेश मैखुरी ने अंकिता की हत्या की तुलना एपस्टीन फाइल्स से की और कहा कि यह हत्या अंतर्राष्ट्रीय स्तर के एपस्टीन फाइल्स का उत्तराखंड संस्करण जैसा है।
सामाजिक कार्यकर्ता चारु तिवारी ने पिछले दो सालों में उत्तराखंड में महिलाओं के बलात्कार की कई घटनाएं गिनाई ।
महापंचायत में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, लोक वाहिनी के राजीवलोचन शाह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के पीसी तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी, गौरव सैनिक संगठन के महावीर राणा, राजस्थान से आई सरिता भारतके आदि ने भी अपने विचार रखे।
मंच संचालन निर्मला बिष्ट ने किया। सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, शिवानी पांडेय, गीता गैरोला और अन्य लोगों ने जनगीत प्रस्तुत किये।
महापंचायत में मुख्य रूप से डॉ. रवि चोपड़ा, नन्द नन्दन पांडेय, परमजीत सिंह सह कक्कड़, अनूप नौटियाल, प्रभात ध्यानी, माया चिलवाल, लोकेश नवानी, पद्मा गुप्ता, मनीष केडियाल, गरिमा दसौनी, डॉ. एसएन सचान, चंद्रकला, विमला कोली, स्वाति नेगी आदि मौजूद थे।
