अंकिता भंडारी हत्याकांड-द्वाराराट में दहाड़े विधायक मदन बिष्ट,कहा हत्यारों को बचा रही सरकार

द्वाराहाट (अल्मोड़ा):अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूरे उत्तराखंड में उबाल है। इसी क्रम में रविवार 4 जनवरी को द्वाराहाट में…

Ankita Bhandari murder case - MLA Madan Bisht roared in Dwararat, said the government is protecting the murderers

द्वाराहाट (अल्मोड़ा):
अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूरे उत्तराखंड में उबाल है। इसी क्रम में रविवार 4 जनवरी को द्वाराहाट में कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई।


द्वाराहाट में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए विधायक मदन बिष्ट ने सरकार और एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध के पीछे कोई न कोई स्पष्ट कारण होता है—चाहे वह आर्थिक लेन-देन हो, दबाव हो या कोई अन्य वजह। अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी ने यौन शोषण को ही अपराध का मुख्य कारण बताया है।


उन्होंने कहा कि जब यह मामला यौन उत्पीड़न और दबाव से जुड़ा है, तो फिर यह बेहद गंभीर सवाल है कि अंकिता द्वारा अपने मित्र को भेजे गए अंतिम व्हाट्सएप संदेश, जिसमें उन्होंने “किसी वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने के दबाव” की बात कही थी, उसके बावजूद अभियुक्त पुलकित आर्य और रिसॉर्ट में काम कर रहे अन्य कर्मचारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) आज तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।


विधायक ने सवाल उठाया कि अब जबकि कुछ नाम सार्वजनिक चर्चा में आ चुके हैं, तो सरकार कथित वीआईपी व्यक्तियों की CDR जांच से क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष तरीके से CDR की जांच कर ली जाए, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।


घटनास्थल पर बुलडोजर चलाने का मामला फिर उठा
सभा में क्राइम सीन पर बुलडोजर चलाने के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया गया। मदन बिष्ट ने कहा कि घटना से जुड़े क्षेत्र की विधायक का एक वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर मौजूद है, जिसमें वह मुख्यमंत्री का धन्यवाद करती दिखाई देती हैं कि उनके अनुरोध पर वननतारा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाया गया।


विधायक मदन बिष्ट ने कहा कि जहां जघन्य अपराध हुआ हो, वहां बुलडोजर चलाना सीधे तौर पर साक्ष्य नष्ट करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि जेसीबी चालक के बयान दर्ज हैं, जिसमें उसने विधायक के निर्देश पर बुलडोजर चलाने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो बेहद चिंताजनक है। विधायक बिष्ट ने कहा कि इससे न सिर्फ सरकार, बल्कि एसआईटी की जांच भी संदेह के घेरे में आ जाती है।


सरकार के बयान पर भी सवाल
मदन बिष्ट ने सरकार द्वारा दिए गए उस बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि “साक्ष्य लाएं, उनकी विश्वसनीयता सिद्ध करें, तब कार्रवाई होगी।” उन्होंने कहा कि साक्ष्य जुटाना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि जनता की।


उन्होंने कहा कि ऐसे बयान यह दर्शाते हैं कि या तो सरकार को अपनी ही पुलिस पर भरोसा नहीं है, या फिर वह जानबूझकर जिम्मेदारी जनता पर डाल रही है। यह शासन की असफलता का खुला स्वीकार है।उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार का पक्ष रखा गया, वह भाजपा के प्रादेशिक कार्यालय में हुई, जहां मंच के पीछे उन्हीं लोगों के बड़े-बड़े फोटो लगे थे, जिनके नाम इस मामले में वीआईपी के रूप में सामने आ रहे हैं। इससे सरकार की मंशा और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।


एसआईटी सदस्य शेखर सुयाल के बयान पर संदेह
सभा में एसआईटी के सदस्य रहे तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक शेखर सुयाल के हालिया बयान पर भी सवाल उठाए गए। मदन बिष्ट ने कहा कि जनता को उनसे कई अहम सवालों के जवाब की उम्मीद थी, लेकिन वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि अंकिता का कमरा पहले ही दिन सील कर दिया गया था और फॉरेंसिक जांच भी हो चुकी थी, तो फिर बुलडोजर चलाने का फैसला किसने और क्यों लिया। यह किसी भी हाल में संयोग नहीं हो सकता।


सीडीआर जांच सबसे अहम सवाल
विधायक ने कहा कि होटल मालिक और कर्मचारियों की घटना से पहले कम से कम 10 दिन की CDR अगर जांची गई थी, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। और अगर जांची ही नहीं गई, तो इसे जांच की गंभीर चूक क्यों न माना जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एसआईटी इन बातों से अनजान थी या फिर उसकी मौन सहमति थी।


आंदोलन की चेतावनी
सभा के अंत में मदन बिष्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में इस सरकार का सत्ता में बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है। यदि सरकार वास्तव में अंकिता को न्याय दिलाना चाहती है, तो तुरंत सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच के आदेश दिए जाएं।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो उत्तराखंड के गांव-गांव, शहर-शहर, देहरादून से लेकर दिल्ली तक एक बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।सभा में विधायक मदन सिंह बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख आरती किरौला, पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस रानीखेत नारायण सिंह रावत, प्रदेश कांग्रेस सदस्य राजेंद्र किरौला, ब्लॉक अध्यक्ष चौखुटिया जीवन नेगी, ग्राम प्रधान मोहन किरौला सहित सैकड़ों महिलाएं और युवाओं ने भागीदारी की।

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