आरओ पानी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच क्या वाकई सुरक्षित है रोजाना यह शुद्ध किया हुआ पीने वाला पानी, जानिए

पानी को सुरक्षित बनाने के लिए अब ज्यादातर घरों में वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल आम हो चुका है। खासतौर पर रिवर्स ऑस्मोसिस यानी आरओ तकनीक…

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पानी को सुरक्षित बनाने के लिए अब ज्यादातर घरों में वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल आम हो चुका है। खासतौर पर रिवर्स ऑस्मोसिस यानी आरओ तकनीक वाले प्यूरीफायर ने लोगों के बीच भरोसा बनाया है, क्योंकि यह तकनीक पानी से गंदगी, घुले हुए खतरनाक तत्व और भारी धातुओं को अलग कर देती है। इसी वजह से बहुत से लोग रोजमर्रा में पीने के लिए आरओ का पानी ही चुनते हैं। हालांकि इसके साथ यह बहस भी चलती रहती है कि क्या लंबे समय तक आरओ का पानी पीना पूरी तरह सुरक्षित है या इससे किसी तरह का जोखिम पैदा हो सकता है।

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कई लोग यह मानते हैं कि आरओ फिल्ट्रेशन की वजह से पानी में मौजूद कुछ जरूरी मिनरल भी कम हो जाते हैं, जिससे शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह चिंता भी जताई जाती है कि लगातार आरओ का पानी पीने से इलेक्ट्रोलाइट कम हो सकते हैं या शरीर का संतुलन गड़बड़ा सकता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक को लेकर लोगों में कई तरह की गलत धारणाएं भी फैली हुई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार आरओ प्रक्रिया पानी को साफ तो करती है, लेकिन इससे सेहत पर बड़े नुकसान की आशंका आमतौर पर नहीं देखी जाती।

आरओ सिस्टम काम कैसे करता है, यह समझना भी जरूरी है। इस प्रक्रिया में पानी एक महीन मेम्ब्रेन से होकर गुजरता है, जो वायरस, बैक्टीरिया, अनचाहे रसायन और घुले हुए नमक जैसी अशुद्धियों को पीछे छोड़ देता है। जिन इलाकों में पानी की गुणवत्ता खराब होती है, वहां यह तकनीक काफी प्रभावी मानी जाती है। हालांकि इस छानने की प्रक्रिया में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ प्राकृतिक मिनरल की मात्रा घट सकती है, इसी वजह से कई लोग मान लेते हैं कि आरओ का पानी जरूरत से ज़्यादा साफ हो जाता है और इसमें पोषक तत्व कम रह जाते हैं।

पोषण विशेषज्ञों का यह मानना है कि शरीर को मिलने वाले अहम मिनरल का मुख्य स्रोत पानी नहीं बल्कि रोज का भोजन होता है। पानी से मिलने वाला पोषक हिस्सा बहुत कम होता है, जबकि फल, हरी सब्जियां, अनाज और प्रोटीन आधारित भोजन आसानी से शरीर की जरूरत पूरी कर देते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति संतुलित आहार ले रहा है, तो आरओ पानी से मिनरल का थोड़ा कम होना भी किसी तरह की कमी नहीं पैदा करता।

किडनी विशेषज्ञों की राय भी इसी के करीब है। उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में आरओ का पानी किडनी की कार्यप्रणाली पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं डालता। आरओ का उद्देश्य पानी को सुरक्षित बनाना है, और साफ पानी शरीर में अपशिष्ट बाहर निकालने में किडनी की मदद ही करता है। वे बताते हैं कि किडनी की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन है, न कि पानी के स्रोत में छोटे बदलाव।
कुछ लोगों को यह आशंका भी रहती है कि लंबे समय तक आरओ का पानी पीने से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति में ऐसा होना काफी दुर्लभ है, क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन मुख्य रूप से आहार, किडनी की कार्यशैली और शरीर के हार्मोन नियंत्रित करते हैं। सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट ज्यादातर खाने से ही मिलते हैं, इसलिए सामान्य जीवनशैली में आरओ पानी पीने से यह संतुलन प्रभावित नहीं होता।

अंत में इतना समझना जरूरी है कि आरओ सिस्टम को लेकर जितनी बातें कही जाती हैं, उनमें से कई धारणाएं अधूरी जानकारी पर आधारित होती हैं। आरओ पानी के इस्तेमाल को नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन यदि किसी व्यक्ति को पहले से किडनी या इलेक्ट्रोलाइट से जुड़ी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है। यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है, इसे किसी भी मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

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