गैस किल्लत की खबरों के बीच सामने आए आंकड़े, देश में कितने LPG सिलेंडर

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध जैसे हालात और वैश्विक तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी…

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दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध जैसे हालात और वैश्विक तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी हैं। इन खबरों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 140 करोड़ की आबादी वाले देश में जब मामला सीधे रसोई के खर्च और ईंधन से जुड़ा हो तो लोगों का चिंतित होना स्वाभाविक है।

भारत अपनी जरूरत की गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, इसलिए यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि देश में फिलहाल गैस का कितना भंडार मौजूद है और सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी हालत में देश की रसोई प्रभावित न हो। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि देश में कुल कितने गैस सिलेंडर उपयोग में हैं।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। अगर इसे सामान्य व्यवस्था के हिसाब से देखें, जहां ज्यादातर परिवारों के पास डबल सिलेंडर कनेक्शन होता है, तो देश में कुल एलपीजी सिलेंडरों की संख्या करीब 66 करोड़ से अधिक मानी जा सकती है। इससे साफ होता है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में गैस की पहुंच तेजी से बढ़ी है। सरकार का कहना है कि फिलहाल गैस की आपूर्ति में किसी तरह की वास्तविक कमी नहीं है।

अगर साल 2014 की स्थिति पर नजर डालें तो उस समय देश में करीब 14.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे। पिछले एक दशक में यह संख्या तेजी से बढ़कर 33 करोड़ के पार पहुंच गई है। इस विस्तार में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की अहम भूमिका रही है। इस योजना के तहत अब तक करीब 10.4 करोड़ गरीब और ग्रामीण परिवारों को सब्सिडी वाले या मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इससे न केवल महिलाओं को धुएं से राहत मिली बल्कि गैस वितरण व्यवस्था गांवों तक भी मजबूत हुई।

सिर्फ सिलेंडर ही नहीं, बल्कि अब शहरों में पाइपलाइन के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी पीएनजी पर भी तेजी से काम हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल करीब 1.5 करोड़ घरों में पाइप के जरिए गैस सप्लाई हो रही है। यह सुविधा फिलहाल बड़े शहरों और प्रमुख नगरों में ज्यादा उपलब्ध है।

पीएनजी को सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है क्योंकि इसमें बार-बार बुकिंग या रिफिल का झंझट नहीं होता। सरकार आने वाले समय में इस नेटवर्क को और अधिक शहरों तक फैलाने की योजना बना रही है।

रसोई गैस के अलावा होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में भी गैस की बड़ी खपत होती है। आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान पाइप गैस का उपयोग कर रहे हैं, जबकि 20 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग भी इसी ईंधन पर निर्भर हैं। इसके अलावा कमर्शियल सिलेंडरों की संख्या भी काफी ज्यादा है, जो व्यापारिक जरूरतों को पूरा करती है। इससे साफ होता है कि देश का गैस वितरण ढांचा काफी व्यापक और मजबूत हो चुका है।

वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने पर हॉर्मुज जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर असर पड़ सकता है, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और गैस कंपनियों के पास पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम लोगों पर न पड़े।

फिलहाल गैस एजेंसियों और सप्लाई नेटवर्क को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी तरह की कालाबाजारी या कृत्रिम संकट पैदा न हो सके।

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