अल्मोड़ा में बोले जलागम प्रबंधन उपाध्यक्ष कोरंगा, संकटग्रस्त क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का होगा जीर्णोद्धार

अल्मोड़ा: “राज्य के विभिन्न संकटग्रस्त जलागम क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का जिर्णोद्धार कर ग्रामीण समाज को विभिन्न विधियों से सतत व समावेशी परिवेश दिलाना जलागम…

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अल्मोड़ा: “राज्य के विभिन्न संकटग्रस्त जलागम क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का जिर्णोद्धार कर ग्रामीण समाज को विभिन्न विधियों से सतत व समावेशी परिवेश दिलाना जलागम प्रबंधन का मुख्य उद्देय है।”

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यह बात प्रदेश जलागम प्रबन्धन उपाध्यक्ष शंकर सिह कोरंगा द्वारा अल्मोड़ा जलागम प्रबंधन की समीक्षा के दौरान कही।


उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, मृदा संरक्षण के साथ वर्षा आधारित कृषि प्रोत्साहन कार्यों का सम्मिलित जिम्मा होने के कारण यह विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।


बीते रोज बुधवार को श्री कोरंगा द्वारा जलागम प्रबन्धन अल्मोड़ा प्रभाग अल्मोडा में प्रभाग द्वारा संचालित विभिन्न परियाजनाओं की समीक्षा की ।
इस दौरान उपनिदेशक भरत सिंह द्वारा उन्हे विस्तार से प्रभाग अन्तर्गत संचालित उत्तराखण्ड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, सारा(SAARA) एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाओं के तहत किए जा रहे कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि सभी क्षेत्रों में स्टाफ द्वारा परियोजना के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु कर्तव्यनिष्टा के साथ कार्य किया जा रहा है तथा एक जनपद एक नदी कार्यक्रम के तहत अल्गोड़ा जनपद में दो नदियों का चयन किया गया है, जिसमें जागेश्वर स्थित जटा गंगा एवं अल्मोड़ा शहर की जीवनदायिनी कोसी नदी का चयन किया गया है।


उन्होंने बताया कि जटा गंगा के उपचार हेतु डी० पी०आर० SAARA देहरादून से स्वीकृत भी हो गयी है जिस पर भौतिक कार्य किये जाने हैं। कोसी नदी के उपचार हेतु भी दो डी०पी०आर० SAARA मुख्यालय देहरादून को स्वीकृति हेतु भेजी गयी है।


उपाध्यक्ष द्वारा कहा कि समस्त कार्मिकों को परियोजना के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु चयनित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें, जिससे कि गांव के अन्तिम व्यक्ति तक परियोजना लाभ पहुंच सके साथ ही कहा कि परियोजना में नवाचार के कार्यों की पहल की जानी चाहिए क्योंकि जल स्रोतों के संवर्धन कार्य में जलागम एक प्रमुख विभाग है, जो अन्य रेखीय विभागों के साथ भी समन्वय कर जल स्रोतों के उपचार का कार्य करता है।

उन्होंने रेखीय विभागों के साथ मजबूत तालमेल बनाने और लक्ष्य आधारित काम करने को कहा। उन्होंने जिले में जल संर्वधन को बढ़ाने के लिए धारें नौले व अन्य जल स्रोतों के जिर्णोद्धार हेतु डी०पी०आर० तैयार कर निदेशललय को भेजने को कहा। उपनिदेशक द्वारा स्टॉफ कम होने की परेशानी बतायी गयी जिस पर उपाध्यक्ष द्वारा आश्वासन दिया गया कि स्टॉफ की कमी को शासन स्तर पर बातचीत कर जल्दी ही पूर्ण किया जायेगा। समीक्षा बैठक में धिरज सिंह, त्रिलोकिनाथ पाण्डेय, गोपाल बिष्ट, सौरभ बर्फाल, मनमोहन तिवारी एवं देवराज साहित आदि स्टाफ उपस्थित रहा।

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