सभी लोग अपनी डाइट में किसी न किसी तेल का उपयोग करते है। तेल खाने का स्वाद भी बढ़ाती है, इसके साथ ही शरीर को ऊर्जा देने का काम भी करता है। हर घर में अलग अलग तरह के तेल का इस्तेमाल होता है।
जिनमें अधिकतर घरों में सरसों का तेल और रिफाइंड ऑयल अधिक यूज होता है। तो वहीं कुछ घरों में ऑलिव ऑयल और मूंगफली का तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है। अब यहां हम आपको बताएंगे कि सरसों तेल, मूंगफली तेल और रिफाइंड में से कौन सा तेल सेहत को कम नुकसान पहुंचाता है।
सरसों तेल : सरसों का तेल भारतीय रसोई में स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक दोनों तरह की चिकित्सा प्रणाली इसे दिल की सेहत के लिए अच्छा बताती हैं। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का ऐसा संतुलन होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करता है और रक्त वाहिकाओं में जमे फैट को धीरे-धीरे घटाने में सहायक होता है। सरसों के तेल में पाया जाने वाला ग्लूकोसाइनोलेट संक्रमणों से बचाव करने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसका स्मोकिंग पॉइंट ज्यादा होने के कारण यह डीप फ्राइंग और रोज़मर्रा की कुकिंग के लिए सुरक्षित माना जाता है, और लंबे समय तक गर्म रहने पर भी खराब नहीं होता।
रिफाइंड तेल : रिफाइंड तेल को इन तीनों में सबसे कम सुरक्षित माना जाता है। इसे बनाने के लिए बहुत अधिक तापमान और रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे तेल के प्राकृतिक पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। रिफाइंड तेल शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, जो बाद में जोड़ों के दर्द और दिल की बीमारियों का कारण बनता है। बार-बार गर्म करने पर इसमें ट्रांस फैट बनने की संभावना बढ़ जाती है।
मूंगफली का तेल: सरसों के तेल की तीखी गंध आती है अगर आप इसको पसंद नहीं करते तो मूंगफली का तेल एक बेहतरीन विकल्प है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन E से भरपूर होता है, जो त्वचा और दिल के लिए बेहतर माना जाता है। इसमें “गुड फैट” की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। यह खाने के स्वाद को संतुलित रखता है और तलने के लिए भी स्थिर रहता है।
AIIMS के डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही मानते हैं कि विभिन्न तेलों में सरसों का तेल शरीर के लिए सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है। उनका कहना है कि कोशिश करनी चाहिए कि हमेशा कच्ची घानी यानी कोल्ड-प्रेस्ड तेल ही इस्तेमाल किया जाए, क्योंकि इसमें प्राकृतिक पोषक तत्व ज्यों के त्यों बने रहते हैं। डॉ. मल्ही यह सलाह भी देते हैं कि शरीर को सभी तरह के हेल्दी फैटी एसिड मिलते रहें, इसके लिए तेल को समय–समय पर बदलना फायदेमंद है। उदाहरण के तौर पर एक महीना सरसों का तेल और अगले महीने मूंगफली या तिल का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही वे यह भी चेतावनी देते हैं कि रिफाइंड तेल का उपयोग बहुत कम करना चाहिए, क्योंकि रिफाइनिंग की प्रक्रिया तेल की गुणवत्ता और पौष्टिकता को काफी हद तक कम कर देती है।
डिस्क्लेमर : यह लेख आम जानकारी के लिए है किसी भी तेल को अपनी डाइट में इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
