22 फरवरी को अल्मोड़ा के सिमकनी खेल मैदान में आयोजित हुए हिंदू सम्मेलन में लाल बाबा द्वारा दिए गए विवादित बयान के बाद से यह मामला चर्चाओं में है। भाजपा के अंदर भी इस पर बहस शुरू हो गई है। भाजपा से जुड़े रहे एडवोकेट आजाद खान ने कल भाजपा को अलविदा कह दिया।उनके भाई राजा खान भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़ी है और भतीजी चांदनी खान नगर 2025 में हुए निगम चुनावों में भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ चुकी है।
सोशल मीडिया साइट फेसबुक में लिखी पोस्ट में एडवोकेट आजाद खान ने कहा कि ”1990 से भाजपा के साथ था। मेरे मित्र भाजपा में थे ,कई उतार चढ़ाव देखे।राजनीति भी देखी। इतना निम्न स्तर नहीं देखा।
अब तो अति हो गई।
मै अपनी भाजपा से इस्तीफा दे रहा हूं।
मुझे पता है कि मेरे इस्तीफे से किसी को फर्क नहीं पड़ेगा, मगर इनके साथ रहना अंतरात्मा को चुभता है।”
पोस्ट में आगे उन्होने लिखा है कि ” एक कहानी सुनी थी जब लंका को सेना जाने के लिए सेतु बंध रहा था तो एक गिलहरी अपनी पूंछ गीली कर उसमें रेत लगा कर लाती और पुल में झाड़ जाती थी तो किसी ने कहा कि क्यों मेहनत कर रही इतनी रेत से पुल में कुछ नहीं होगा तो वह कहने लगी कि जब इतिहास लिखा जाएगा तो मैं पुल बनाने वाले के साथ थी लिखा जाएगा।
मै भी लाल बाबा को लाने वाले लोगों के साथ वालो के साथ था ,नहीं लिखवाना चाहता हूं।
इस लिए अब बहुत हो गया।
मैने अपनी सोच ली आप अपनी देखो।”

