आपातकाल(Emergency) के बीच की आफ़त कम करो सरकार! जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने सीएम को लिखा पत्र

आपातकाल(Emergency) के बीच की आफ़त कम करो सरकार! जिला पंचायत सदस्य की सरकार से बड़ी मांग

आपातकाल(Emergency) के बीच की आफ़त कम करो सरकार! जिला पंचायत सदस्य की सरकार से बड़ी मांग

पिथौरागढ़ से: 28 मार्च-

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आपातकाल(Emergency) के बीच की आफत कम करो सरकार!

मुख्यमंत्री जी, आज सुबह आपको एक मेल भेजा था, अभी अभी खबर आई कि उत्तराखंड में 31 मार्च को 13 घंटे आने जाने की छूट रहेगी.

कुछ खुशी हुई ओर ज्यादा दुख हुआ. हाय रे उत्तराखंड राज्य बनने के बीसवें साल में भी तेरे भूगोल को नौकरशाह तो रहे इस राज्य में जन्मे लोग भी नहीं समझते है.

जिस अधिकारी ने इस छूट की नोटशीट बनाई हो, उसमें साइन करने वाले नौकरशाह आईएएस व अनुमति देने वाले मंत्री आदि आदि धन्य है आप, जो इस राज्य के भौगोलिक परिस्थितियों से अभी भी अज्ञानी है.

एक उदाहरण देहरादून से दो बजे चलने वाली बस 24 घंटे के बाद धारचूला पहुंचती है. देहरादून से पिथौरागढ़ आने में ही उसे 16 से 18 घंटे लगते है.

फिर तेरह घंटे में जहां पर पहुंचेगा उसका चक्का वहीं पर जाम हो गया तो फिर कहां जाएंगे वे लोग. आज करीबन दस बारह दिन के बाद नेपाल से धारचूला के दो नागरिक अपने देश पहुंचे तो उसकी पोस्ट डालते ही उत्तराखंड के साथ बाहरी प्रदेशो में फंसे उत्तराखंडी फिर अपने राज्य की तरफ आशा भरी नजरो से देखकर बोलने लगे है.

हम खुद असहाय क्या बोल सकते है. लिख सकते है, लिख रहे है, इस पर भी एक देशभक्त धमका रहा था कि तुम्हारा हाल शाहिनाबाग जैसा होगा, डर तो गया था लेकिन जिस तरह से चारो तरफ से चीख पुकार सुनाई दे रही है ऐसे में लाँकडाउन का पूर्ण सम्मान करते हुए हम सरकार को जरुरी सुझाव दे रहे है.

जो होगा देखा जाएगा.कैदियो को पैरोल पर छोड़ रहे है, जगह खाली हो रही है, झूठ पर कुछ भी कर ले फरकार देख लेंगे, लेकिन अपने लोगो को कोरोना जैसी मौत के सामने बिलखते नहीं देख सकते.

भाई हम तो केवल सुझाव दे रहे है, बजट पर भी तो आप मांगते हो, जब आपको अपनी कथित टीआरपी बढ़ानी होती है. अभी हम परेशान है, उसे कम करने के लिए कुछ सुझाव दे रहे है तो धमकी मत दो.

राज्य के अनगिनत लोगो के सुझाव विशेषकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जो मेरे राजनीतिक विरोधी रहे है उनके लगातार सुझाव के बाद अपना स्टेट जागा व भी अधुरा.

आजकल पुलिस व प्रशासन के अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे है, तानाशाही चल रही है. पिथौरागढ़ के एक अधिकारी डीएम ओफिस के बाहर एक युवा जिसके हाथ में एक कागज था उसे खदेड़ रहे है.

एक अखबार ने यह फोटो छाप कर साहब की जै जै कर दी. अरे साहब पुलिस के सिपाही नहीं है , वे भी पूछते है.आप तो बड़े साहब जो ठेरे आपके पास अधिकार है,

उस युवा की तकलीफो को दूर कर दो.महामारी के समय आपको दुवा देगा, भल हैजौ त्यर सैप. हमने तो घर से निकलना छोड़ दिया है, कौन अंग्रेजो की गुलामी के इन निशानियो से मिलकर नयी आजादी के सोचे.

चलिए फिर भी मन न होने के बाद भी मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि राज्य के भीतर कौने कौने तक कैसे फंसे लोगों को पहुंचाया जा सकता है. राज्य के बाहर विभिन्न क्षेत्रो में जो हमारे फंसे है उन्हे सही सलामत घर तक पहुंचाने के लिए कुछ सोचा व किया जाय.

मुझे रोज आ रहे अनगिनत फोन व संदेशो के प्रति उत्तरदायी अपने को समझते हुए सीएम व सीएस के साथ अपने जिले के डीएम साहब को ईमेल भी कर रहा हूं. मेरी लिखी बातो का बुरा मत मानिए, आप सभी बुरा मानने वालो से क्षमा चाहता हूँ.

… जगत मर्तोलिया, सदस्य जिला पंचायत , पिथौरागढ़

नोट- यह विचार जगत मर्तोलिया ने हमें व्हटशप पर भेजे हैं…उन्होंने इसे अपनी सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है. उनके विचार के हर शब्द को ज्यों का त्यों रखा गया है.