उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की अल्मोड़ा शाखा में लोन स्वीकृति में अनियमितता का मामला सामने आया है। इस मामले में बैंक के तत्कालीन चार अधिकारियों और ऋणी फर्म के दो निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इन पर बैंक प्रबंधन समिति की स्वीकृति के विपरीत ऋण सीमा बढ़ाने, कम जमानत सुरक्षा लेने और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप हैं।
बैंक प्रबंधन की विधिक राय, लीगल ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
बैंक प्रबंधक समीर भटनागर की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार तीन मई 2017 को बैंक प्रबंधन समिति की बैठक में मैसर्स मां नंदा बिल्डकॉम प्राइवेट लिमिटेड अल्मोड़ा की दो करोड़ रुपये की कैश-क्रेडिट ऋण सीमा के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई थी। फर्म के निदेशक आनंद सिंह चौहान और सुनीता चौहान हैं।
आरोप है कि तत्कालीन बैंक अधिकारियों ने समिति के फैसले के विपरीत ऋण स्वीकृति पत्र संख्या 304 जारी कर दो करोड़ रुपये की स्वीकृत ऋण सीमा को बढ़ाकर सात करोड़ रुपये कर दिया।
इस मामले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक दीपक कुमार, महाप्रबंधक धर्मवीर सिंह, सहायक महाप्रबंधक कर्ण सिंह बिष्ट, शाखा प्रबंधक मनोज राणा तथा फर्म के निदेशक आनंद सिंह चौहान और सुनीता चौहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच और लीगल ऑडिट में ऋण सुरक्षा के लिए बैंक के पास रखी गई इक्विटेबल मॉर्टगेज की संपत्ति निर्धारित मानकों की तुलना में कम पाए जाने का आरोप है। इसके अलावा ऋण से संबंधित दस्तावेजों और कोलेटरल सिक्योरिटी के प्रलेखन में भी कथित तौर पर कूटरचना और हेराफेरी सामने आई है। बैंक ने पत्र संख्या 1691 के माध्यम से मामले में कार्रवाई की है।

