जनसंघ के संस्थापक एवं पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री सोबन सिंह जीना की जयंती उनके गृह क्षेत्र के गांव ढौल में भी मनाई गई। इस अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया गया।
उन्हें याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सोबन सिंह जीना जल, जंगल, जमीन, जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर ग्रामीणों के अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। गांव की सीमा के भीतर स्थित बेनाप भूमि को संरक्षित वन की श्रेणी में शामिल किये जाने का उन्होंने पुरजोर विरोध किया। उनका मानना था वन पंचायत के लिए एक पृथक अधिनियम बनाया जाना चाहिए। सिविल वन से होने वाली समस्त आय गांव में ही खर्च होनी चाहिए। बिनसर वन्य जीव विहार की स्थापना के खिलाफ उन्होंने सड़क व अदालत दोनों जगह पर संघर्ष किया।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के इन 26 सालों में जल जंगल जमीन संबंधित कानून अधिक कठोर हुए हैं।
कहा कि जीना जी जनता के जिन अधिकारों की पैरवी आजीवन करते रहे, उन्हें आगे बढ़ाना ही स्वर्गीय जीना को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर लोक प्रबंध विकास संस्था के ईश्वर जोशी, कनिष्ठ प्रमुख निर्मल नयाल, वन पंचायत सरपंच ठाकुर सिंह भंडारी, मोहन सिंह भंडारी, बिशन सिंह, दीप्ति भोजक,हेमा देवी, सुशील कांडपाल, गीतांशु जोशी, किशन सिंह भंडारी, वीरेंद्र राम, अमित कुमार, डूंगर सिंह, बलवंत सिंह, इंद्र सिंह भंडारी, नंदी देवी उपस्थित रहे।

